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चीनी छोड़िये, इन 5 चीजों से बढ़ाइये मिठास और सेहत…

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Kohramlive : सुबह की चाय हो, मिठाई हो या फिर कोई पसंदीदा डेजर्ट, चीनी हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। लेकिन स्वाद बढ़ाने वाली यही सफेद चीनी सेहत के लिये बड़ी परेशानी भी बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा मात्रा में रिफाइंड चीनी का सेवन वजन बढ़ने, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकता है।

अच्छी बात यह है कि मीठे का स्वाद छोड़े बिना भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाई जा सकती है। प्रकृति ने हमें ऐसे कई विकल्प दिए हैं, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ख्याल रखते हैं। आइये जानते हैं चीनी के पांच लोकप्रिय प्राकृतिक विकल्पों के बारे में।

1.धागे वाली मिश्री : पारंपरिक और बेहतर विकल्प

अगर गुड़ या शहद का स्वाद पसंद नहीं आता, तो धागे वाली मिश्री एक अच्छा विकल्प हो सकती है। यह सामान्य रिफाइंड चीनी की तुलना में कम प्रोसेस्ड मानी जाती है।

मिश्री की तासीर ठंडी मानी जाती है और यह पेट की जलन को शांत करने में मददगार हो सकती है। हालांकि इसमें भी कैलोरी होती है, इसलिये इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिये।

2. गुड़ : स्वाद के साथ पोषण भी

भारतीय रसोई में गुड़ का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। चीनी के विपरीत यह कम प्रोसेस्ड होता है और इसमें आयरन, पोटैशियम तथा मैग्नीशियम जैसे खनिज पाये जाते हैं।

गुड़ पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और शरीर को ऊर्जा देने में मददगार माना जाता है। हालांकि इसमें भी प्राकृतिक शर्करा मौजूद होती है, इसलिये इसका सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिये।

3.खजूर : प्राकृतिक मिठास का पावरहाउस

खजूर स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। इसमें फाइबर, विटामिन और कई जरूरी मिनरल्स पाये जाते हैं।

फाइबर की मौजूदगी के कारण यह ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकने में मदद कर सकता है। खजूर का पेस्ट या पाउडर केक, स्मूदी, शेक और मिठाइयों में चीनी की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है।

4.शुद्ध शहद : स्वाद और गुणों का मेल

शुद्ध शहद को लंबे समय से प्राकृतिक मिठास के स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाये जाते हैं।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शहद को उबालकर या तेज आंच पर पकाकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिये। गुनगुने पानी, ग्रीन टी या दूध में मिलाकर इसका सेवन किया जा सकता है।

5. स्टीविया : मीठा भी, कैलोरी भी नहीं

स्टीविया एक प्राकृतिक पौधे से तैयार किया जाने वाला स्वीटनर है, जिसे कई जगहों पर ‘मीठी तुलसी’ भी कहा जाता है। यह चीनी से कई गुना अधिक मीठा होता है, लेकिन इसमें कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट लगभग नहीं के बराबर होते हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि स्टीविया ब्लड शुगर को प्रभावित नहीं करता, इसलिये वजन नियंत्रित करने और डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिये यह एक बेहतर विकल्प माना जाता है। चाय, कॉफी और अन्य पेय पदार्थों में इसका उपयोग किया जा सकता है।

मीठा खाइए, लेकिन समझदारी के साथ

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मीठे पदार्थ का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिये नुकसानदायक हो सकता है। इसलिये चाहे विकल्प प्राकृतिक ही क्यों न हों, संतुलित मात्रा में सेवन करना सबसे जरूरी है। सही चुनाव और संतुलित खानपान से स्वाद और सेहत, दोनों का संतुलन बनाये रखा जा सकता है।

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