Kohramlive : भारत में बढ़ती Diabetes की बीमारी, हर घर की चिंता बन चुकी है। ऐसे में हरियाणा के भिवानी के एक किसान ने अपनी मिट्टी से ऐसा हल निकाला है, जो अब चर्चा का विषय बन गया है। भिवानी जिले के मंडान गांव के किसान वीरेंद्र सिंह ने अपने साथी के साथ मिलकर एक खास तरह का स्प्राउटेड मल्टीग्रेन आटा तैयार किया है। यह आटा पारंपरिक वैदिक चक्कियों पर धीमी गति से पीसा जाता है, जिससे पोषण बरकरार रहता है। इस आटे में पांच अनाज का अनोखा मेल, गेहूं, जौ, बाजरा, ज्वार और रागी।
पहले अनाज को भिगोया जाता है, फिर अंकुरित किया जाता है और फिर सुखाकर पीसा जाता है। हर दाने में पोषण का ऐसा संगम, जो शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देता है। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि मल्टीग्रेन आटा ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मददगार होता है। जौ में मौजूद ‘बीटा-ग्लूकन’ शुगर के अवशोषण को धीमा करता है। बाजरा और ज्वार में मौजूद मैग्नीशियम इंसुलिन को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। रागी में पाये जाने वाले तत्व कार्बोहाइड्रेट को शुगर में बदलने की गति को कम करते हैं।
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Diabetes मरीजों के लिये क्यों खास?
- इस आटे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता।
- अंकुरित अनाज पचने में आसान होते हैं और पोषक तत्व बेहतर तरीके से शरीर में जाते हैं।
- यह आटा पेट को देर तक भरा रखता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती।
देसी स्वाद, आधुनिक सोच
- यह आटा सिर्फ बीमारी के लिए नहीं, बल्कि हेल्थ कॉन्शियस लोगों के लिए भी एक बेहतर विकल्प बन सकता है।
- FSSAI और पोषण विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि खुद पिसवाया गया आटा ज्यादा फायदेमंद होता है।
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