Kohramlive : क्रिकेटर शिखर धवन के 9 साल के बेटे को पारिवारिक समारोह में शामिल होने भारत लाने का निर्देश दिया गया है। यह निर्देश अदालत ने क्रिकेटर धवन से अलग रह रही उनकी पत्नी आयशा मुखर्जी को दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अकेले मां का बच्चे पर अधिकार नहीं है। फैमिली कोर्ट के जज ने दिये फैसले में आयशा के बच्चे को भारत लाने पर आपत्ति जताने पर खिंचाई भी की है। अदालत ने कहा कि शिखर का परिवार साल 2020 से बच्चे से नहीं मिला है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, धवन दंपत्ति अब अलग रह रहे हैं। आयशा अपने बच्चे के साथ ऑस्ट्रेलिया में रहती है, वहीं धवन भारत में रहते हैं। धवन दंपत्ति तलाक और बच्चे की कस्टडी से संबंधित कानूनी मामले भारत और ऑस्ट्रेलिया में शुरू किये हैं। शुरू में परिवार का पुनर्मिलन 17 जून को तय किया गया था। हालांकि, आयशा ने उस समय बच्चे को लाने पर आपत्ति जताई, क्योंकि वह स्कूल नहीं जा पायेगा। इसके बाद बच्चे के स्कूल बंद के दौरान एक जुलाई के लिए पुनर्निर्धारित किया गया है। इसके बाद आयशा ने फिर से तय समारोह पर यह तर्क देते हुए आपत्ति जताई कि तारीख तय करने से पहले परिवार के अधिकांश सदस्यों से सलाह नहीं ली गई थी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता और उसके माता-पिता को अपनी आंखों के सामने बच्चे के साथ होने की खुशी होगी। बेशक, याचिकाकर्ता के बच्चे ने अगस्त, 2020 से भारत का दौरा नहीं किया है।
न्यायाधीश ने रेखांकित किया कि आयशा इस बात का पर्याप्त आधार नहीं दे पाई है कि वह क्यों नहीं चाहती थी कि बच्चा धवन परिवार से मिले। वह क्यों नहीं चाहती कि बच्चा बार-बार भारत में याचिकाकर्ता के घर और उसके रिश्तेदारों से परिचित हो। इस परिस्थिति में जब बच्चे की स्कूल की छुट्टी है तो याचिकाकर्ता की बच्चे को कुछ दिनों के लिए भारत में रखने की इच्छा क्यों नहीं पूरी की जा सकती है।
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