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झारखंड में एक और डॉक्टर को निगल गया कोरोना, RIMS के जूनियर डॉक्टर ने तोड़ा दम

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  • 2010 बैच का स्टूडेंट थे सिराजुद्दीन, 10 दिन से मेडिका में चल रहा था इलाज
  •  JDA ने कहा- मुआवजा के साथ इलाज का खर्च वहन करे सरकार

RANCHI : RIMS के जूनियर डॉक्टर और DTMH फाइनल ईयर के छात्र डॉ. सिराजुद्दीन की जान कोरोना ने सोमवार को ले ली। कोरोना संक्रमित होने के बाद पिछले 10 दिनों से मेडिका अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। संक्रमित होने से पहले वे रिम्स में कोरोना मरीजों के इलाज में जुटे हुए थे।

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दूसरी लहर में रिम्स में कार्यरत डाक्टर की पहली मौत

दूसरी लहर में रिम्स में कार्यरत डॉक्टर की यह पहली मौत है। दूसरी लहर में अभी तक रिम्स डॉक्टर की मौत नहीं हुई थी। लोग संक्रमित होकर ठीक हो जा रहे थे। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने डॉ. सिराजुद्दीन की मौत के बाद सरकार से कोरोना संक्रमण से होने वाले डॉक्टर के परिजनों के लिए मुआवाजा की मांग की है। साथ ही कोरोना संक्रमित स्वास्थकर्मी के इलाज का खर्चा स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से सरकार को वहन करने की मांग की है।




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फाइनल ईयर के थे स्टूडेंट

सिराजुद्दीन पीजी फाइनल ईयर के स्टूडेंड थे। वे बतौर जूनियर डॉक्टर डॉक्टर रिम्स में मरीजों की सेवा कर रहे थे। उनकी मौत की खबर के बाद से चिकित्सकों में गम और भय का माहौल है। सिराजुद्दीन गिरिडीह जिले के रहने वाले थे।

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हेल्थ मिनिस्टर ने जताया दुख

स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने डॉ. सिराजुद्दीन के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि विपदा काल में राज्य के सभी चिकित्सक अपनी जान की बाज़ी लगाकर लोगों की मदद कर रहे हैं। आज दुःखद समाचार मिला कि रिम्स के DTMH फाइनल वर्ष के जूनियर चिकित्सक डॉ. सिराजुद्दीन जी का निधन हो गया है, ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को दुख सहने का साहस दें।




JDA ने सरकार के सामने रखी ये मांगें

  1. कोरोना से मृत स्वास्थकर्मियो के परिवार को उचित मुआवजा मिले।
  2. कोरोना संक्रमित स्वास्थकर्मी के इलाज का खर्च स्वास्थ्य बीमा द्वारा झारखंड सरकार वहन करे।
  3. कोरोना इलाज में काम कर रहे चिकित्सको को सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे ही काम कराया जाए।
  4. डॉक्टरों के बकाया एरियर का भुगतान किया जाए।
  5. रिम्स में ECMO मशीन की व्यवस्था कि जाए।
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