Ranchi : कभी झारखंड के गांवों में आम के पेड़ सिर्फ छांव और मौसमी फल का जरिया हुआ करते थे। आज वही आम हजारों ग्रामीण परिवारों की खुशहाली की कहानी लिख रहे हैं। खेतों से निकलकर झारखंड के आम अब लंदन और दुबई की मंडियों तक पहुंच रहे हैं। इस बदलाव के केंद्र में हैं CM हेमंत सोरेन का दूरदर्शी विजन और सखी मंडल की दीदियों की अथक मेहनत, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई उड़ान दी है। ‘पलाश’ ब्रांड के तहत चल रहा झारखंड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव अब गांवों में आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई पहचान बन चुका है। आम की हर खेप के साथ ग्रामीण महिलाओं के सपने भी ऊंची उड़ान भर रहे हैं।
कोरोना काल में बोया गया बीज, आज बन गया खुशहाली का बगीचा
कोरोना महामारी के कठिन दौर में जब हजारों प्रवासी मजदूर अपने गांव लौटे थे, तब CM हेमंत सोरेन के निर्देश पर शुरू हुई बिरसा हरित ग्राम योजना ने उम्मीद की नई राह दिखाई। सखी मंडल की दीदियों और लौटे प्रवासी श्रमिकों ने इसे अपनाया और आज उसका रिजल्ट पूरे राज्य के सामने है। झारखंड में करीब 1.86 लाख एकड़ भूमि पर आम के बगीचे लहलहा रहे हैं। इन बागानों से लगभग 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका और रोजगार का सहारा मिला है। इस वर्ष करीब 52 हजार एकड़ बागान तुड़ाई के लिये तैयार हैं और लगभग 50 हजार मीट्रिक टन आम उत्पादन का अनुमान है।
दीदियों के हाथों से लिखी जा रही आत्मनिर्भरता की कहानी
झारखंड की ग्रामीण महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता का नया इतिहास लिख सकती हैं। सखी मंडल की दीदियां अब केवल खेती तक सीमित नहीं हैं। आम की तुड़ाई, संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक की पूरी जिम्मेदारी वे खुद संभाल रही हैं। JSLPS के माध्यम से किसानों को फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO) से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल रहा है।
झारखंड का आम अब लंदन और दुबई की थाली में
एक समय था जब झारखंड का आम स्थानीय बाजारों तक सीमित रहता था। आज उसकी मिठास विदेशों तक पहुंच रही है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में सिमडेगा से 1,580 किलोग्राम प्रीमियम आम सीधे लंदन भेजे गये हैं। वहीं रामगढ़ क्लस्टर से 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आम दुबई निर्यात किये जा चुके हैं। सिमडेगा, रामगढ़ और पूर्वी सिंहभूम जैसे जिले इस वैश्विक अभियान की अगुवाई कर रहे हैं। आमों की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरे, इसके लिये ICAR -RCIR , पलांडू तकनीकी सहयोग और गुणवत्ता मानक सुनिश्चित कर रहा है।
तीन ग्रेड में बंटा बाजार, किसानों को मिल रहा बेहतर दाम
किसानों को अधिकतम लाभ मिले, इसके लिये आमों को ग्रेड-ए, ग्रेड-बी और ग्रेड-सी श्रेणियों में बांटा गया है। ग्रेड-ए के प्रीमियम आम UAE, सऊदी अरब और UK जैसे देशों में निर्यात किये जा रहे हैं। वहीं घरेलू बाजार में इन्हें पलाश मार्ट और अपना मार्ट के जरिये आकर्षक पैकेजिंग में बेचा जा रहा है। गुमला के FPO ने अकेले 2 हजार किलो आम की आपूर्ति अपना मार्ट को की है। वहीं, ग्रेड-बी और ग्रेड-सी आमों को रिटेल स्टोर, बस स्टैंड, जिला मुख्यालय, पलाश कैनोपी कियोस्क और साप्ताहिक हाटों के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। झारखंड में सक्रिय करीब 115 FPO इस अभियान से जुड़े हुये हैं। राज्यभर में लगाये गये पलाश मैंगो कैनोपी काउंटर्स के माध्यम से अब तक 2,24,200 किलोग्राम आमों की बिक्री हो चुकी है। इससे 60.51 लाख रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया है। यह आंकड़ हजारों ग्रामीण परिवारों की बढ़ती आय और बदलती जिंदगी की कहानी कहता है।बाजार को और व्यापक बनाने के लिये सरकार की बातचीत अब ब्लिंकिट, रिलायंस फ्रेश और कशिश मॉल जैसे बड़े कॉर्पोरेट समूहों से अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
गांवों से उठ रही समृद्धि की नई खुशबू
झारखंड के गांवों में आम के बाग अब सिर्फ फल नहीं दे रहे, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान और आर्थिक मजबूती भी दे रहे हैं। CM हेमंत सोरेन की पहल और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार का विजन और जनता का परिश्रम एक साथ चलते हैं, तो गांवों की तस्वीर ही नहीं, तकदीर भी बदल जाती है। आज झारखंड का आम ग्रामीण सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल के रूप में भी देश-दुनिया में पहचान बना रहा है।


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