Ranchi (Pawan Thakur/Rupam) : अंदर हो या बाहर, छोटे-बड़े किसी अपराधी में कोई डर-भय नहीं। जिसे जब चाहा, जहां चाहा, जैसे चाहा ठोक डाला। इसका जीवंत उदाहरण है रांची के हाई सिक्योरिटी जोन मोरहाबादी में दागी कालू लामा का मारा जाना। इस वारदात ने शासन और प्रशासन को अंदर से हिलाकर रख दिया। राज्य के युवा और जाबांज CM हेमंत सोरेन ने राजधानी में बिगड़ते लॉ एंड ऑर्डर को गंभीरता से लिया। CM ने प्रधान सचिव राजीव अरूण एक्का, मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, डीजीपी नीरज सिन्हा, नगर आयुक्त मुकेश कुमार, एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा से लेकर कई अधिकारियों के साथ आपात बैठक कर यह हिदायत दी है कि चाहे जो हो जाये, राजधानी में शांति और सुकून का माहौल बने। अपराधियों के आतंक से राजधानी को मुक्त किया जाये। राजधानी का यह हाल चिंताजनक, पूरे राज्य में बहुत गलत मैसेज दे जायेगा। अपराधियों के उठने फन को कुचल दिया जाये। सीएम के सख्त आदेश के बाद हरकत में आई रांची पुलिस मौका-ए- वारदात पर गई। मोरहाबादी में लगनेवाले ठेले खोमचे और अन्य छोटे-बड़े दुकानों पर गाज गिरने की आशंका है।
मारे गये अपराधी कालू लामा का गिरोह बदला लेने की फिराक में जुट गया है। वहीं गुजरे 24 घंटे में रांची पुलिस इस कांड के संदेही सूत्रधार लवकुश शर्मा और मेन शूटर सोनू शर्मा तक नहीं पहुंच पाई है। लवकुश शर्मा, सोनू शर्मा, बिट्टू खान, राजू चोटी और अजय सिंह के खिलाफ लालपुर थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। केवल एक राजू चोटी को हिरासत में लेने की बात छनकर बाहर आ रही है। वहीं राजू चोटी खुद को बेकसूर बता रहा है। गैंगवार के पीछे का कारण भी अबतक सामने नहीं आया है। इस कांड में शामिल हत्यारों का चेहरा सीसीटीवी में कैद है। सबकी पहचान कर लेने का दावा भी पुलिस कर रही है। पुलिस की दो टीम को जिले से बाहर भेजा गया है। बील में छुपे हत्यारों को खोज निकालने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।
कभी जिगरी दोस्त रहे लवकुश शर्मा और कालू लामा पहले एक साथ थे। कालू को टपकाने में जिस सोनू शर्मा का नाम उछला है, उसके साथ मिलकर लामा कई घटना को अंजाम दे चुका है। गोंदा थाना क्षेत्र में मनीष ओझा के घर पर फायरिंग करने में दोनों का नाम सामने आया था। जेल के अंदर ही दोनों में किसी बात को लेकर अदावत हो गई। इसके बाद लामा बागी हो गया।
उसने अपना एक अलग गैंग बनाकर अपने पुराने बॉस से ही पंगा ले लिया। लामा उसी इलाके में अपने नाम का आतंक कायम करना चाहता था, जहां पहले शर्मा गिरोह का सिक्का चला करता था। बाजार हाट से लेकर जमीन-खरीद बिक्री तक में वसूली शुरू हो गई। जमीन पर पोजिशन दिलाने के नाम पर भी उगाही का दौर शुरू हो गया। हालांकि आज की तारीख में राजधानी में जर, जोरू और जमीन के लफड़े में न जाने कितनी जानें चली गई। पहले पुलिस जमीन के लफड़े से कोसों दूर रहती थी, पर अब बेखौफ कई जमीन माफियाओं को थाने में इंट्री करते हुये देखा जा सकता है।




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