Kohramlive Desk : कैब बुकिंग अब आसान नहीं। देश के कई बड़े शहरों में अब कैब सर्च करना एक मुश्किल काम हो गया है। कस्टमर को लंबी वेटिंग, खराब सर्विस और बड़ी संख्या में कैंसिलेशन का सामना करना पड़ रहा है। कारण यह बताया जा रहा है कि कंपनियों द्वारा काम का तरीका बदलने से कैब ड्राइवरों की आमदनी घट गई है। शुरुआती दौर में ड्राइवरों ने भी पहले ज्यादा इंसेटिव मिलता था, कैब प्लेटफॉर्म को कम कमिशन का देना और काम के निर्धारित घंटे जैसी सुविधाएं शामिल थीं। उनका कहना है कि पिछले कुछ सालों में किराए के कमीशन में 20-30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी अब आसमान छू रही हैं। ड्राइवरों का कहना है कि 2017 से पहले कुछ ड्राइवर एक महीने में 1 लाख रुपये तक कमात थे, लेकिन अब कंपनियों की तरफ से ड्राइवरों को मिलने वाला इंसेंटिव नहीं के बराबर है।
अब बहुत कम मिलता है इंसेंटिव
कैब चलाने वाले एक ड्राइवर ने मनीकंट्रोल को बताया कि Ola – Uber के लिए बेंगलुरु में एक ड्राइवर औसतन दिन में लगभग 14 घंटे और महीने में 25 दिन काम करता है। वह अकेले ईंधन पर हर महीने 20,000 रुपये से ज्यादा खर्च करता है। अब ईंधन की लागत दोगुनी हो गई है और उन्हें केवल हफ्ते के आखिर में इंसेंटिव मिलता है।
ड्राइवर ले सकते हैं डिसीजन
कई बार ट्रिप एक्सेप्ट होने के बाद कैंसिल होने के पीछे Ola – Uber द्वारा ऐप में किए गया एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इसमें ड्राइवर अब राइड रिक्वेस्ट आने पर डेस्टिनेशन और पेमेंट के तरीके को देख सकते हैं। ड्राइवर बताते हैं कि अब तय कर सकते हैं कि हमारे लिए क्या अच्छा है। ड्राइवरों की प्राथमिकता अब लॉन्ग ट्रिप्स होती है, जिसमें उन्हें 200-300 रुपये या उससे भी ज्यादा मिल सकें।
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