UP : भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, अपनी धर्मपत्नी के साथ जब तुलसीपीठ पहुंचे तो यह आस्था, राष्ट्रधर्म और गुरु-शिष्य परंपरा की त्रिवेणी बन गई। जनरल द्विवेदी ने तुलसीपीठ में कांच मंदिर जाकर भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना की। इसके बाद जगद्गुरु रामभद्राचार्य से मिले। वहां जो हुआ, उसने न केवल श्रद्धालुओं को, बल्कि पूरे देश को चौंका दिया। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के हवाले से मीडिया में आई खबर के अनुसार, “मैंने उन्हें वही राम मंत्र दिया, जो माता सीता ने हनुमान जी को दिया था, जिससे लंका विजय संभव हुई। और गुरुदक्षिणा में मांगा है पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर!” सुबह 9 बजे सेना प्रमुख का हेलिकॉप्टर आरोग्यधाम परिसर में उतरा। सुरक्षा के लिहाज से चित्रकूट एक छावनी में बदल गया था। रास्तों पर बैरिकेड्स, हर मोड़ पर निगरानी थी। जनरल द्विवेदी ने गुरुदेव के चरणों में बैठकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली, आशीर्वाद लिया। अब पूरे देश में उठ रहा है सवाल, क्या चित्रकूट की यह दीक्षा, भारत के लिए एक नई रणनीतिक भूमिका की शुरुआत है?
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