गीतांजलि की उड़ान, क्या बोल गये पिता और प्रिसिंपल… जानें

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Hazaribagh : हर आंख नम थी, लेकिन ये आंसू खुशी के थे। झारखंड के भवनाथपुर की गलियों में आज कोई सन्नाटा नहीं था। वहां गीत गूंज रहे थे, ढोल बज रहे थे और हर जुबां पर एक ही नाम था, गीतांजलि। आज जब जैक बोर्ड का परिणाम आया, तो इंदिरा गांधी बालिका विद्यालय, हजारीबाग की हर एक ईंट मुस्कुरा रही थी। क्योंकि उसी ने सीने से लगाकर तैयार की थी वो बेटी, जो अब झारखंड टॉपर बन चुकी थी, 493 अंकों के साथ पूरे राज्य की शान। जहां और स्कूल परिणाम घोषित होने पर जश्न मनाते हैं, वहीं हजारीबाग का इंदिरा गांधी बालिका विद्यालय जश्न रचता है। गीतांजलि के साथ-साथ रितु, अमृता, पूजा, शिवानी, श्रेया, साक्षी, वर्षा, तनिष्का और कोमल जैसी बेटियों ने टॉप-5 में अपनी मौजूदगी दर्ज की, वो भी अकेले दम पर। विद्यालय के प्राचार्य प्रवीन रंजन की आंखों में गर्व था। उन्होंने शिक्षकों को गले लगाकर कहा, “ये सिर्फ नंबर नहीं हैं, ये उस मिट्टी की ताकत हैं जहां बेटियों को सपनों की उड़ान दी जाती है।” छठी कक्षा से ही यहां बेटियों की बुनियाद रखी जाती है। तीन-तीन परीक्षाएं, अनुशासन और परिश्रम की पाठशाला, यही वजह है कि हजारीबाग की यह धरती अब झारखंड के शिक्षा मानचित्र पर सबसे चमकीला सितारा बन गई है। गीतांजलि के पिता की आंखों में नमी और सीने में गर्व था। उन्होंने कहा, “हमने तो सोचा था कि बेटी पढ़ ले यही बहुत है, लेकिन आज वह नीट की तैयारी कर रही है। हम तो भगवान से यही दुआ करेंगे कि वह डॉक्टर बनकर गांव की सेवा करे।”

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