Kohramlive Desk : गरीबों के हक में सारा दावा दम तोड़ गया। गरीब गंगाराम अपनी पत्नी गीता देवी को बचा नहीं सका। लाचार-बेवश गंगाराम चंदा करके अपनी गीता का दाह संस्कार किया। गंगाराम के झोपड़ी में न चारपाई, न बिस्तर और न रजाई है। सोने-लेटने के लिये जमीन पर पुआल का बिस्तर बना रखा था। बीती रात पत्नी गीता को बहुत जोर से ठंडा लगने लगा। कभी पांव तो कभी हाथ की हथैली रगड़ अपनी गीता को गर्मी देने की कोशिश की, पर उसकी हालत बिगड़ती चली गई। गंगाराम कुछ समझ पाता, उसकी गीता सदा के लिये आंखें मूंद ली। कुछ लोगों ने सुना था कि उसने कई रातें ठीक से सोई नहीं थी, भरपेट खाई नहीं थी। अब वो सदा के लिये सो गई। गरीब की कोख से जन्मी गीता की जिंदगी बस यूं ही कट रही थी। पति गंगाराम की हालत ऐसी है अगर एक दिन मजदूरी करने नहीं गया तो खाना नसीब नहीं होता। अब उसे हर सरकारी कार्ड दिये जाने की बात सामने आने लगी है।
बदनसीब गंगाराम का दुखड़ा सुन दिल दरकता है। करीब 20 साल पहले भाई से झगड़ा हो जाने के बाद गंगाराम अपनी बहन-बहनोई के पास आकर रहने लगा। कोई काम नहीं मिला, तब पेट की खातिर मजदूरी करने लगा। खून-पसीने बहा पाई-पाई जमा किया। कुछ जमीन खरीदी और एक झोपड़ीनुमा घर बना उसी में पत्नी के संग रहने लगा। इन्हें कोई संतान नहीं था। गंगाराम ने मीडिया को बताया कि उसके पास खाने को अन्न और तन ढंकने को कपड़े तक नहीं है। राशन, बर्तन और बिस्तर तक नहीं है। सरकारी लाभ लेने के लिये कई बार दौड़-धूप किया, पर कोई कार्ड नहीं बना। हाल में गंगाराम का आधार कार्ड बना है, पर उन्हें कभी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला। यह वाकया शाहजहांपुर के बंडा से उछलकर सामने आया है।
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