Giridih : राजकुमार हाजरा की आंखों में बस एक सपना था, एक ऐसा घर जो उसका अपना हो। लेकिन इस सपने की कीमत उस सिस्टम ने पांच हजार रुपये तय कर दी, जहां सरकार कहती है “घर हर गरीब का हक है”। जब राजकुमार ने डरना नहीं, लड़ना चुना। सीधे धनबाद ACB के दरवाजे पर पहुंच गये। ACB की टीम ने जाल बिछाया। रोजगार सेवक राजेश साहू को जैसे ही पांच हजार की रकम मिली, वैसे ही उसे धर लिया गया। उसके हाथ में अबुआ आवास की रिश्वत थी, और चारों ओर कानून की बेड़ियां। राजेश साहू कहता है, “मुझे फंसाया गया।” लेकिन ACB के पास सबूतों की कहानी है। यह वाक्या गिरिडीह के टीकामगहा पंचायत के जमुआ प्रखंड का है।
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