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CM हेमंत सोरेन ने PM मोदी के सामने रख दी ये डिमांड… जानें

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Delhi : नई दिल्ली में नीति आयोग की दसवीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में पहुंचे झारखंड की धरती से निकले जुझारू व युवा CM हेमंत सोरेन की गरजती आवाज में कहा, “विकसित भारत का सपना, विकसित गांवों के बिना अधूरा है। झारखंड खनिजों से भरा है, लेकिन लोग खाली हाथ हैं। कंपनियां खनन के बाद जो जमीन छोड़ देती हैं, उसे सरकार को लौटाया जाये। हमारी सरकार हर महीने 50 लाख महिलाओं को ₹2500 देती है। ये सिर्फ पैसा नहीं, ये है सम्मान, ये है आत्मनिर्भरता की चाबी। सीबीए एक्ट में संशोधन हो, क्योंकि जमीन हमारी, दर्द हमारा, अधिकार भी हमारा हो।” CM हेमंत सोरेन ने बकाया 140 करोड़ रुपये मांगे। उन्होंने नॉन पेमेंट ऑफ लैंड मुआवजा का मसला उठाते हुये कहा कंपनियों पर झारखंड का ₹1,40,435 करोड़ बकाया है। इतिहास का हिसाब चाहिये, अब और नहीं। CM ने कहा कि CSR और DMFT, अब राज्य की मर्जी से चले। कंपनियों के CSR और DMFT फंड को राज्य की प्राथमिकता में जोड़ा जाये। जो झारखंड का है, वो झारखंड के लोगों के लिए हो। CM ने साहिबगंज में रेल और पुल की बात उठाई। साहिबगंज को कार्गो हब बनाने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा “गंगा पर एक और पुल, या फिर ऊंचा बांध, जिससे सीमावर्ती राज्यों तक जाये विकास की लहर।” CM ने कहा कि “झारखंड सरकार हर जिले की हेल्थ प्रोफाइल बना रही है। यही मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया जाये। बीमारी से पहले तैयारी जरूरी है।” ‘विकसित भारत @2047’ में झारखंड की दावेदारी पर जोर दिया गया। राजस्व बंटवारे पर सीधा सवाल कर कहा गया “GST लागू होने के बाद हमें नुकसान हुआ, अब हिस्सेदारी 41% से बढ़ाकर 50% कीजिये।” CM हेमंत सोरेन ने कहा कि कैमरून में फंसे मजदूरों को राज्य सरकार वापस लाई। CM की मांग है कि “विदेश में काम करने वाले मजदूरों की वीजा और सुरक्षा में केंद्र सरकार भागीदार बने।” CM ने कहा कि झारखंड के 16 जिले नक्सल से प्रभावित थे, अब बचे सिर्फ दो। लेकिन विशेष सहायता अभी भी 16 जिलों के लिए जारी रखी जाये।” CM हेमंत सोरेन ने झारखंड की जनता की जरूरतें, पीड़ा और आकांक्षाएं, सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रख दीं। इस ऐतिहासिक बैठक में झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्थानिक आयुक्त अरवा राजकमल और योजना सचिव मुकेश कुमार भी मौजूद थे।

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