Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा के DC पशुपति नाथ मिश्रा की अध्यक्षता में ‘आत्मा’ शासकीय निकाय की बैठक हुई। बैठक में वित्तीय वर्ष की समीक्षा हुई, वहीं, आने वाले वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना को सर्वसम्मति से मंजूरी भी दी गई। बैठक में कृषि, पशुपालन, सहकारिता और मत्स्य जैसे विभिन्न विभागों द्वारा 2025-26 में किये गये कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। इसके साथ ही आगामी वर्ष के लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा कर नई कार्ययोजना को हरी झंडी दी गई। DC ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाये, ताकि गढ़वा जिला राज्य में विकास के मामले में अग्रणी बना रहे।
फील्ड विजिट और तकनीकी सहायता पर जोर
DC ने अधिकारियों, बीटीएम और एटीएम को नियमित रूप से फील्ड विजिट करने का निर्देश दिया, ताकि किसानों की समस्याओं का समाधान सीधे जमीन पर हो सके। जिले में चल रही कृषि गतिविधियों की जानकारी देते हुये बताया गया कि मेराल (चामा), भवनाथपुर (बनसानी) और रमना में तीन कृषक पाठशालायें संचालित हो रही हैं, गढ़वा, नगर ऊंटारी और रंका में एग्री क्लीनिक के माध्यम से तकनीकी सलाह दी जा रही है बैठक में तालाबों के जीर्णोद्धार, डीप बोरिंग, पंपसेट और मुख्यमंत्री ट्रैक्टर वितरण योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। वहीं, गव्य विकास और मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत गाय वितरण, मिल्किंग मशीन, वर्मी कम्पोस्ट यूनिट की प्रगति को संतोषजनक बताया गया।
मत्स्य और पशुधन योजनाओं में भी तेजी
‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में स्वीकृत सभी योजनाओं को पूर्ण कर लिया गया है। वहीं पशुपालन विभाग के तहत 977 लाभुकों को डीबीटी के माध्यम से सीधे राशि का भुगतान किया जा चुका है। जिले में कार्यरत 195 पैक्स के तहत 100 और 500 मेगाटन क्षमता वाले गोदामों के निर्माण के लिये भूमि उपलब्ध कराने में आ रही बाधाओं पर DC ने संबंधित अंचलों को शीघ्र कार्रवाई का निर्देश दिया। बैठक के समापन पर DC पशुपति नाथ मिश्रा ने ‘सहकार से समृद्धि’ का संकल्प दिलाते हुये सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को शपथ भी दिलाई। सहकारिता सप्ताह के तहत 29 जून से 6 जुलाई 2026 तक विशेष अभियान चलाया जायेगा। इस दौरान सभी एमपीसीएस में सदस्यता अभियान चलाकर किसानों को सहकारिता से जोड़ा जायेगा। DC ने जिले के किसानों से अपील की कि वे आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुये मौसम के अनुसार ही बुआई और कृषि कार्य करें, ताकि बेहतर उत्पादन सुनिश्चित हो सके।
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