Jamshedpur (Vinod Keshri) : कहते हैं हर रिश्ता काबिले तंजीम है, पर मां के मोहब्बत में कोई चूक या खोट नहीं होती। वह मां ही होती है जब कभी किसी कारण रोटी कम पड़ जाये तो वह बोला करती है कि मुझे भूख नहीं। मां के मन में तो कभी कोई खोट नहीं आया पर जवान दोनों बेटे बहू की नीयत में खोट आ गई। अगर समाजसेवी शोभा देवी की बातों में दम है तो मां की दुख भरी गाथा सुन हर किसी का कलेजा फट जायेगा। इल्जाम है कि दोनों बेटे और बहुयें खुलेआम यह बोलते फिर रहे हैं कि जितना जल्दी यह बुढ़िया मर जाये, उतना बेहतर। सबकुछ हमलोगों का हो जाएगा। बीमार मां की देखभार कर रही नानी को भी खूब खरी-खोटी सुनाई जाती है। ताकि वह अपनी बीमार बीटे को छोड़ चली जाये। उसका कोई देखभाल करने वाला ना हो। बेटों की यातना से दुखी बीमार मां बोलती है कि वह डायलिसिस पर है। उसका इलाज तक नहीं कराया जा रहा है। खाने-पीने के लिए फूटी कौड़ी तक नहीं दी जाती।
उसकी हालत बहुत खराब है। अपना हक पाने के लिए वह थाने से लेकर कई लोगों के पास जा चुकी है, पर बात आई-गई हो जाती है। इस दुखी मां की आंखों में तब आंसू छलक आते हैं जब उसे पागल बोला जाता है। जिस बेटों की परवरिश में मां ने अपनी पूरी जिंदगी न्यौछावर कर दी, वह मां जिंदगी के अंतिम पड़ाव में चंद सांसों के लिए रो-कलप रही है। इतना जुल्मों सितम सहने के बाद भी मां के मुख से बेटे-बहूओं के लिए दुआ ही निकलती है। सुनें क्या बोली बीमार मां, देखभाल कर रही नानी और समाजसेवी शोभा देवी….
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