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एक दारोगा ने ऐसा सताया कि तीन बहनें हो गईं….

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दूध का दूध, पानी का पानी कर दूंगा : SSP

रांची (रुपम) : जर…जोरू…जमीन… छोटे से छोटे और बड़े से बड़े अपराध की जड़ इनमें से ही कोई एक होती है. इस कहानी में किरदार भी कुछ अलग नहीं… जोरू और जमीन के ईर्द-गिर्द बुनी यह कहानी आगे चल कर इतनी खौफनाफ हो गई कि इसमें जमीन मालिक को देनी पड़ी अपनी जान की आहुति. कहानी के मुख्य किरदार हैं जमीन विक्रेता सुनील और जमीन खरीदार सुमन मिश्रा। इसके अलावा इस कहानी में और भी किरदार हैं… गरीब मगर हंसता खेलता सुनील गुप्ता का परिवार… जिसमें है उनकी पत्नी सहोद्री, तीन बेटियां नंदिनी, रानी और रीना। दूसरी तरफ है जमीन खरीदार सुमन मिश्रा और उनके सिपाही पति मदन मिश्रा।

कहानी ऐसे शुरू होती है कि… जमीन विक्रेता सुनील गुप्ता अंडे बेचकर अपना परिवार चलाता था. माली हालत ऐसी थी कि बड़ी मुश्किल से राशन-पानी जुटता था। सुनील ने सोचा कि घर की जमीन बेचकर कुछ पैसे आ जाएंगे तो दिन बदलेंगे। बेटियों की शादी भी हो जाएगी। यही सोचकर उन्‍होंने जमीन बेचने का फैसला किया। दारोगा मदन मिश्रा की पत्नी सुमन मिश्रा के साथ 631000 में तय हुआ सौदा।

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एग्रीमेंट के समय मदन मिश्रा ने एक लाख रुपये भी दिए। कहा कि- बाकी पैसा रजिस्‍ट्री के वक्‍त देंगे। 28 अगस्‍त 2008 को उन्होंने रजिस्‍ट्री तो करवा ली, पर नहीं दिए पूरे पैसे। दिया सिर्फ 50 हजार रुपया। कहा- जल्‍द दे दूंगा बाकी पैसे। पैसों के लिए पापा बार-बार लगातार उनके पीछे दौड़ते रहे। काफी भाग-दौड़ करने और गिरगिराने के बाद 15 महीने में थोड़ा-थोड़ा कर 340000 (तीन लाख चालीस हजार) रुपए दिए। एक चेक भी दिया 80 हजार रुपए का, जिसपे पैसे पाने वाले का नाम था खुद मदन मिश्रा का और हस्‍ताक्षर थे किसी और के। चेक भी बाउंस कर गया। जब बाकी के 140000 (एक लाख चालीस हजार) रुपए मांगने पापा गए तो उन्‍हें पैसा देने से इनकार कर दिया। वर्दी का रौब दिखाते हुए धमकाया और कहा- नहीं दूंगा पैसे जहां जाना है जाओ, जो करना है करो। और कर दिया टाइटल शूट का केस।

पापा काफी तनाव में आ गए। केस लड़ने में सारे पैसे खत्‍म हो गए। आगे केस लड़ने के लिए कई लोगों से उधार लिया। लोगों का कर्ज उतारने के लिए एक स्‍मॉल फाइनांस बैंक से लोन लिया। उसे भी उतारने में वे असमर्थ थे। इधर मदन और सुमन बार-बार घर आते और घर खाली करने को कहते। साथ ही जान से मारने की धमकी भी पापा को देते थे। कई बार लड़कों को बुलाकर पापा को धमकाया भी। इनके दबाव के कारण 22 फरवरी 2021 को पापा ने फंदे पर झूल अपनी जान दे दी। सुनील प्रसाद की बेटी नंदिनी ने सुखदेवनगर थाने में 23 फरवरी को इस मामले में केस दर्ज कराया है। केस के जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर करण पासवान बनाये गये हैं।

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