Chaibasa : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब झारखंड के कई शहरों खासकर रांची और इससे सटे चाईबासा के किचन और होटलों पर साफ दिख रहा है। कॉमर्शियल Gas के दाम अचानक उछल गये हैं और हालत यह है कि महंगी कीमत देने के बाद भी सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहा।
नतीजा, होटल, ढाबे और कई घरों में फिर से लकड़ी और कोयले के चूल्हे जलने लगे हैं। पश्चिमी सिंहभूम में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत अब करीब ₹2,247 तक पहुंच गई है, जबकि चाईबासा में इसकी दर लगभग ₹2,235.50 बताई जा रही है। यह बढ़ोतरी करीब ₹218 तक की मानी जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि कीमत बढ़ने के बावजूद बाजार में सप्लाई लगभग ठप हो गई है।
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Gas के घरेलू उपभोक्ताओं की भी बढ़ी परेशानी
सिर्फ होटल कारोबारी ही नहीं, आम घरों की हालत भी खराब हो गई है। गैस रिफिल के लिये 25 से 35 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। बड़े परिवारों में रोज का चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। कई घरों में लोग मजबूरी में लकड़ी या कोयले का सहारा ले रहे हैं। गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर होटल और ढाबा उद्योग पर पड़ा है। सुबह होते ही होटल संचालक लकड़ी और कोयले के टालों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। भट्टी जलते ही पूरा होटल धुयें से भर जाता है। कामगारों की आंखों में जलन और आंसू है।
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होटल की दीवारें और बर्तन काले पड़ने लगे हैं। ईंधन महंगा होने से खाने की थाली और मीनू महंगे होने के संकेत हैं। एक गृहिणी नीतू सिंह ने बताया कि उन्हें रसोई गैस सिलेंडर लिये 35 दिन से ज्यादा हो गये। ऑनलाइन बुकिंग तक नहीं हो रही है। पूछने पर उन्हें बताया जाता है कि भोर के 5 बजे बुकिंग करने पर हो जायेगी। सुबह-सुबह बच्चों को स्कूल भेजना पड़ता है। वहीं, कभी-कभी लाइट तक नहीं रहती। किरोसिन तेल मिलता नहीं। स्टोव कब का हटा चुके हैं। बिना टिफिन बच्चों को स्कूल भेजते समय कलेजा फट दरक जाता है। शहर में जलावन खोजना भी मुश्किल हो गया है।
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