Hazaribagh(Sunil Sahu) : जवान मुकेश कुमार यादव के लिये वो रात किसी भयानक सपने से कम नहीं थी। सिरका की सड़क पर भागती हुई गाड़ियों के बीच उसकी दुनिया अंधेरे में डूब गई थी। एक तेज टक्कर, चीख, और फिर गहरी बेहोशी… जब आंख खुली, तो सामने थी अस्पताल की सफेद छत और दर्द से कराहता हुआ शरीर। परिवार की आंखों में चिंता थी, डॉक्टरों के माथे पर बल। किसी ने कहा—”पैर बचाना मुश्किल है!” पर शायद किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। हजारीबाग के आरोग्यम अस्पताल में झारखंड के मशहूर प्लास्टिक सर्जन डॉ. विक्रांत ने इस नामुमकिन को मुमकिन करने की ठानी। एक नाजुक ऑपरेशन, घंटे भर की जद्दोजहद, और फिर… चमत्कार! लगभग 28 साल के मुकेश का पैर कटने से बच गया। “ये किसी वरदान से कम नहीं!” मां ने डॉक्टर के हाथों को चूमते हुये कहा। अस्पताल ने ना सिर्फ नई तकनीक से ऑपरेशन किया, बल्कि बेहद कम खर्च में उसे नई जिंदगी भी दी। अब मुकेश ठीक हो रहा है, हर कदम के साथ नये सपनों की ओर बढ़ रहा है। कभी-कभी, बस एक सही फैसले से पूरी जिंदगी बदल जाती है… और आरोग्यम ने यही किया!
कम खर्च में हुआ इलाज
आरोग्यम अस्पताल में यह ऑपरेशन बेहद किफायती दरों पर किया गया। अस्पताल के निदेशक हर्ष अजमेरा ने कहा,
“हमारा लक्ष्य मरीजों को उन्नत चिकित्सा सुविधायें किफायती दरों पर उपलब्ध कराना है। मुकेश कुमार यादव के सफल ऑपरेशन में हमारी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम किया। हमें खुशी है कि वे स्वस्थ हो रहे हैं और भविष्य में भी हम मरीजों को सर्वोत्तम चिकित्सा सेवाएं प्रदान करते रहेंगे।”
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