Hazaribagh(Sunil/Pooja) : हजारीबाग के केरेडारी का गर्री कला, छोटा-सा, शांत-सा इलाका। लेकिन इन दिनों यहां की मिट्टी भी एक अजीब-सी बेचैनी महसूस कर रही है। कहते हैं, स्कूल और मदरसे बच्चों का भविष्य संवारते हैं, पर यहां, मदरसा एहसानुल उलूम पर जो आरोप लगे हैं, वे भरोसे को घायल कर रहे हैं। स्थानीय लोग अवाक हैं, कहते हैं कि दैनिक उपस्थिति में जहां सिर्फ 6 बच्चे दिखाई देते हैं, वहीं स्टाफ में 6 शिक्षक पदस्थापित हैं। इनमें से 5 शिक्षक सरकार से मानदेय पाते हैं। ग्रामीणों का इल्जाम है कि मदरसे में बाहरी छात्रों के नाम पर नामांकन खड़ा किया जाता है, ग्रामीणों का दावा है, प्रिंसिपल अब्दुल सुभान के नेतृत्व में यह ‘कागजी पढ़ाई’ और मनमानी का खेल वर्षों से चल रहा है। शिकायत करने पर भी नतीजा सिफर रहता है। असली झटका तो तब लगता है जब ग्रामीण बताते हैं कि “हर साल 10वीं के करीब 200 बच्चों की मार्कशीट तैयार होती है।” ऐसा कैसे? क्यों? किसके लिये? और किनके नाम पर? सुनें क्या बोले प्रिंसिपल और ग्रामीण…
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