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याद किए गए डॉ. हैनीमैन

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रांची : डॉक्टर यूएस वर्मा के पॉलीक्लिनिक में डॉक्टर क्रिश्चियन फ्रेडरिक  सैमुअल हैनीमैन की 266 वीं जयंती सादगी पूर्ण तरीका से कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए मनाई गई। इस अवसर पर नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर 70 रोगियों को ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, हिमोग्लोबिन, spo2 वजन, लंबाई तथा लक्षणों पर आधारित कई रोगों की जांच की गई। सभी को निःशुल्क दवा भी दिया गया। होम्योपैथी के जनक का जन्मदिन आज ही के दिन 266 वर्ष पूर्व, 10 अप्रैल 1755 को जर्मनी के एक छोटे शहर मैयशेन, सेक्ससोनी, ड्रेस डॉन  में हुआ था। इनका देहांत 2 जुलाई 1843 को सेक्ससोनी में हुआ। डॉक्टर हनीमैन ने एक अनुवाद के क्रम में यह देखा कि सिनकोना मलेरिया को ठीक करती है, परंतु स्वस्थ व्यक्ति को सिनकोना की अधिक मात्रा देने से मलेरिया पैदा हो जाती है और इसी मूल मंत्र के आधार पर डॉक्टर हनीमैन ने शोध कार्य कर पाया कि होम्योपैथिक दवा का यदि लाखों भाग सूक्ष्‍म करके दी जाए तो पुराने से पुराने रोगों को जड़ से ठीक किया जाता सकता है। डॉक्टर वर्मा ने डॉक्टर हनीमैन को एक महानतम चिकित्सक बताया।

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जिन्होंने विश्व को एक ऐसा चिकित्सा पद्धति देने का पुनीत कार्य किया, जिससे विश्व में व्याप्त 90% रोगों का जड़ से समाप्त किया जा सकता है। यह एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जो कोशिकाओं के आंतरिक विकृतियों को दूर करने और पुराना से पुराना रोगों को ठीक करने में सक्षम है। एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिससे जोड़ों का दर्द, अर्थराइटिस, गठिया, साइटिका दर्द, ओस्टियो आर्थराइटिस, न्यू राइटिस, पुराना से पुराना माइग्रेन दर्द, बर्ड फ्लू,इनफ्लुएंजा, स्वाइन फ्लू , कलरा,  मलेरिया, टाइफाइड, फाइलेरिया, कोरोना वायरस, हृदय रोग, पीसीओडी, यूटरिन फाइब्रॉयड, ब्रेन ट्यूमर, पैरालाइसिस, कोरोनरी ऑरटरी डिजीज, किडनी फेलियर, सोरीएसीस, कुष्ठ रोग, आईला मसा, पुराना से पुराना खांसी है। दम्मा प्रोस्टेट ग्लैंड का बढ़ जाना,सिरोसिस लिवर, लिवर का बढ़ जाना, किडनी स्टोन, गाल ब्लैडर स्टोन हड्डी का कमजोर हो जाना,अनावश्यक बाल बढ़ना, बाल झड़ना, बच्चियों में दाढ़ी मूछ आना, महिलाओं के अनेक हार्मोनल परेशानियां, बवासीर भगंदर,नींद की कमी, मानसिक परेशानियां अवसाद, आत्महत्या करने की प्रवृत्ति, नशीले पदार्थ का सेवन, हाथों में कंपन और चक्कर इत्यादि का सर्वोत्तम इलाज सिर्फ और सिर्फ होम्योपैथिक में उपलब्ध है। कोरोना वायरस के संक्रमण काल में देखा गया कि वायरस पर काम करने वाले चुने हुए 12 औषधियों का मिश्रण कर बनाया गया यूभी 66 संजीवनी गोल्ड ड्रॉप इतने अधिक सफल साबित हुआ कि इसके सेवन करने वाले किसी भी व्यक्ति को कोरोना वायरस छू भी नहीं पाया और जिन लोगों को कोरोना वायरस का संक्रमण पाया गया। इसी संजीवनी यूवी 66 के सेवन से 3 से 5 दिन में ही सभी रोगी स्वस्थ हो गए। यह भी होम्योपैथिक का एक बहुत बड़ा चमत्कार है। इसके सेवन से विधानसभा के अध्यक्ष, अनेक मंत्रियों, सीनियर आईएएस ऑफिसर, सीनियर आईपीएस ऑफिसर‌ 3 से 5 दिन में ही पूरी तरह स्वस्थ हो गए। इससे कोरोना वायरस से लड़ने में भविष्य के लिए अति उत्तम औषधि साबित होगा। महात्मा हनीमैन को उनके इस आविष्कार के लिए शत शत नमन।

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