रांची की 19 नाबालिग लड़कियां थी लापता, रेस्क्यू कर लाया गया घर

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सिलाई-कढ़ाई सिखाने के नाम पर ले गये गुजरात

रांची :  रांची के अनगड़ा के सुदूरवर्ती जंगल क्षेत्र लेप्सर, बुढ़ा कोचा, गोंदली टोली, टाटी सिंगारी आदि गांवों की रहने वाली 30 लड़कियों को पांच सिंतबर को गुजरात के सूरत स्थित पलसाना श्रीम्प फैक्ट्री से बरामद किया गया। इन्हें सिलाई-कढ़ाई सिखाने के नाम पर गुजरात ले जाया गया था और वहां मछली ढोने और पैकिंग का काम पूरी रात कराया जाता था। इनमें से कई बच्चियां बीमार थीं। 19 नाबालिग लड़कियों को रेस्क्यू कर रांची पुलिस बस से शुक्रवार देर रात रांची पहुंची। देर रात वापस लौटने के कारण बिजुपाड़ा स्थित किशोरी निकेतन में शेल्टर में नाबालिगों को रखा गया। श्रीम्प फैक्ट्री सूरत के चौर्यासी विधानसभा के भाजपा विधायक झंखना पटेल के चचेरे भाई की बतायी जा रही है।

छह अगस्त से लापता थी लड़कियां

बरामद की गई लड़कियां पिछले छह अगस्त से लापता थीं। बच्चियों के रेसक्यू के लिए भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष आरती कुजूर ने मुख्यमंत्री, सांसद और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया था। इसके बाद सभी को बरामद किया गया। पुलिस ने इन लड़कियों को बहला-फुसलाकर गुजरात ले जाने के आरोप में मंजू कुमारी को गिरफ्तार कर लिया है। बूढ़ाकोचा की लापता एक लकड़ी के पिता ने तीन सितंबर को अनगड़ा थाने में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सूरत से बच्चियों को लाने गई टीम का नेतृत्व अनगड़ा थाना प्रभारी अनिल कुमार तिवारी व सब इंस्पेक्टर कोमल कुमारी ने किया।

फर्जी आधार कार्ड बनवा कर, नाबालिग लड़कियों को बताया वयस्क मजदूर

जानकारी के मुताबिक, सूरत के चौर्यासी विधानसभा की भाजपा विधायक झंखना पटेल के चचेरे भाई की झींगा फैक्ट्री में एनजीओ और कंट्रोल रूम से मिली खुफिया सूचना के आधार पर जांच की गई थी। इस दौरान कई बाल मजदूर पकड़े गए थे। पलसाणा पुलिस ने जांच की पता चला कि नाबालिग लड़कियों को मजदूरी कराने के लिए वयस्क का आधार कार्ड बनवाकर झारखंड से लाया गया था। झारखंड पुलिस फर्जी आधार बनाने वाले की जांच कर रही है। पुलिस ने अनुसार  कुल 30 नाबालिग लड़के- लड़कियां काम करने के लिए आए थे। इसमें से 19  नाबालिग को झारखंड पुलिस अपने साथ ले गई।

आधार कार्ड उम्र का प्रमाण पत्र नहीं है : अनिल कुमार तिवारी

झारखंड के अनगड़ा थाना के थाना प्रभारी अनिल कुमार तिवारी ने बताया कि आधार कार्ड फर्जी नहीं है, लेकिन छेड़छाड़ करके उसमें जन्म तिथि को बदल दिया गया है। आधार कार्ड उम्र का प्रमाण पत्र नहीं है। यह तो एक आइडेंटिफिकेशन है। कंपनी को भी नाबालिग लड़कियों की उम्र को वेरिफाई कर लेना चाहिए था। अब पता चला है कि फैक्ट्री में 19 नाबालिग लड़कियों से मजदूरी करवाई जा रही थी। उम्र के लिए स्कूल का सर्टिफिकेट मान्य है।

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