Kohramlive : रात गहरी थी, लेकिन आसमान पुंछ, उरी और तंगधार के ऊपर लाल हो चुका था। पाकिस्तान की तोपें फिर बौखलाईं, जैसे आतंक के ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर की बमवर्षा ने उनके होश उड़ा दिये हों। जब आम कश्मीरी परिवार दुआओं में मगन था, तभी सरहद पार से आई आग ने घरों को निगलना शुरू कर दिया। मनकोट में एक मां अपनी 13 साल की बेटी के खाना बना रही थी, तभी मोर्टार शेल ने उनके घर को तहस-नहस कर दिया। मां की चीखें खामोश हो गईं, बेटी जिंदा बची, लेकिन जिंदगी के सबसे बड़े दर्द के साथ। पुंछ, राजौरी और उरी, गोलियों की गर्माहट से झुलस उठे। दस नागरिक शहीद हुये, दो मासूम, एक औरत, और कई बेबस चेहरे, जिनका जुर्म बस इतना था कि वो भारत की सरहद पर रहते थे। पाकिस्तान ने अंधाधुंध गोलाबारी की, लेकिन भारत चुप नहीं रहा। जवाब आया, गूंजता हुआ, गरजता हुआ, ठोकता हुआ। कृष्णा घाटी, शाहपुर, करनाह और उरी में भारत ने फिर सीमा पर वो भाषा बोली, जिसे पाकिस्तानी सेना जानती है, गोलियों की जवाबी गूंज।
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