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World Soil Day : किसानों का जीवन संवारना है, तो मिट्टी से करें प्‍यार

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  • मिट्टी की नेचुरल फर्टिलिटी बनी रहने पर ही फामर्स होंगे खुशहाल

कोहराम लाइव डेस्क : माटी की कोई न भाषा होती है, न मजहब। बस यह तो सभी जीवों को जिंदगी देती है। असल में यह किसानों की मां है। किसानों के जीवन की हर सांस माटी के लिए ही समर्पित होती है। किसान माटी को अपनी मां इसलिए कहते हैं, क्‍योंकि माटी ही उनका पालन-पोषण करती है। हर किसी के जीवन के मूल में जिन पांच तत्‍वों की चर्चा की जाती है, उनमें क्षिति यानी मिट्टी भी शामिल है, पर किसानों के जीवन के तो सारे तत्‍व ही मिट्टी में समाहित हैं, इसलिए उनके स्‍नेह और आदर का भाव माटी के प्रति अलग ही होता है। किसानों का जीवन यदि संवारना है, तो सबको माटी से प्‍यार करना चाहिए। माटी की नेचुरल उर्वरा शक्ति बनी रहे, तभी किसान खुशहाल होंगे। यह अच्‍छा नहीं कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश के किसानों को अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने की नौबत आए।

 वर्ष 2013 में लिया गया था मृदा दिवस मनाने का फैसला      

माटी है तो किसान हैं। इसी महत्‍व को ध्‍यान में रखकर हर साल 5 दिसंबर को विश्व मृदा यानी मिट्टी दिवस मनाने की शुरुआत की गई। दुनिया यह दिवस सबसे पहले वर्ष 2017 में 5 दिसंबर  को मनाया गया था। 20 दिसंबर 2013 को विश्व मिट्टी दिवस मनाने का फैसला लिया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी और उर्वरा के प्रति जागरूक करना है। आधुनिक समय में रासायनिक खादों और कीटनाशकों के लिए दवाओं के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरा शक्ति समाप्त होती जा रही है। इस उद्देश्य से भी  विश्व मिट्टी दिवस मनाया जाता है। आइए, चर्चा करते हैं विश्व मिट्टी दिवस के बारे में।

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इतिहास के झरोखे से

हर साल विश्व मिट्टी दिवस थाइलैंड के राजा भूमिबोल अदुल्यादेज के जन्मदिन पर मनाया जाता है। इनका जन्म 5 दिसंबर को ही हुआ था। कहा जाता है कि राजा भूमिबोल अदुल्यादेज ने 70 साल तक शासन किया था। इस दौरान राजा भूमिबोल ने कृषि पर विशेष ध्यान दिया था। ऐसा भी कहा जाता है कि राजा भूमिबोल अपने देश के हर गरीब और किसान से मुलाकात करते थे और उनकी समस्याओं को दूर करने की कोशिश करते थे।

स्‍वस्‍थ धरा, खेत हरा

दुनिया के कई देश कृषि प्रधान हैं। इसे ध्‍यान में रखकर यूएनओ ने किसानों के हित के लिए कई अभियान चलाए हैं, जिनमें मृदा संरक्षण पर विशेष बल दिया गया है। भारत में आधी आबादी कृषि पर निर्भर है। भारत में भी मृदा संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए के भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘स्वस्थ धरा, खेत हरा’ का नारा देकर किसानों के हौसले को बुलंद करने की कोशिश की  है।

किसान फसल बीमा योजना

भारत में किसानों के हित के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें किसान फसल बीमा योजना प्रमुख है। इस योजना के तहत किसानों को सालाना तीन किस्‍तों में 6000 रुपये दी जाती है। इसके अतिरिक्त 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिट्टी की गुणवत्ता में विशेष सुधार के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की शुरुआत की थी। इस योजना से भी किसान लाभन्वित हो रहे हैं।

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