Ranchi : करीब 5 हजार कलाकारों ने एक साथ छऊ नृत्य कर पूरी दुनिया में अपने नाम का डंका बजा दिया। पारंपरिक वेषभूषा में एक साथ छऊ नृत्य का नजारा अद्भुत था। यह नजारा दिखा सिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय गूंज महोत्सव में। इस महोत्सव का उद्घाटन झारखंड के गर्वनर रमेस बैस ने किया। समारोह में शामिल इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के सुब्रतो दास ने छऊ नृत्य को पारंपरिक नृत्य के तौर पर रिकॉर्ड्स में शामिल करने का ऐलान किया। वहीं सुदेश कुमार महतो को रिकॉर्ड्स से जुड़े मेडल पहनाया। इससे पहले एक साथ 150 छऊ कलाकारों के एक साथ नृत्य का रिकॉर्ड था।
गूंज महोत्सव का उद्घाटन करते हुये गर्वनर रमेस बैस ने कहा कि महोत्सव का पहला दिन महिलाओं के नाम समर्पित है। जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास होता है। युवाओं और किसानों को बेहतर मुकाम देकर राज्य और देश को खुशहाल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सुदेश कुमार महतो ऊर्जावान हैं। सिल्ली के साथ राज्य को बेहतर बनाने की उनकी सोच और मंशा कामयाब हो। इससे पहले गर्वनर रमेस बैस का ढोल, नगाड़े और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच गर्मजोशी से स्वागत किया गया। झारखंड तीरंदाजी संघ की उपाध्यक्ष नेहा महतो ने शॉल ओढ़ाकर और मोमेंटो देकर उनका स्वागत किया। इसके साथ ही राज्यपाल एक साथ 5001 कलाकारों का ‘छऊ नृत्य कार्निवाल और 1500 युवाओं बच्चों का सांस्कृतिक प्रदर्शन देख भाव विभोर हुये। वहीं सुदेश कुमार महतो ने कहा कि झारखंडी संस्कृति और परंपरा की विरासत का जतन करने की कोशिश के साथ गूंज महोत्सव क्षेत्र के विकास और समाज के सशक्तिकरण में सराहनीय भूमिका अदा की है। इसके दारोमदार गूंज परिवार से जुड़े 74 हजार परिवार हैं। उनका मकसद समाज के हर वर्ग का सशक्तिकरण करना है। आजसू नेता सुदेश कुमार महतो की अगुवाई में महोत्सव की कामयाबी के लिये एक हजार वॉलंटियर, एसएचजी, गूंज परिवार के सदस्यों के अलावा समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
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