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आस्‍था के साथ भगवान आदित्‍य को जलार्पण से हासिल होती है जीवन शक्ति

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कोहराम लाइव डेस्क : भारतीय धर्म और आस्‍था की परंपरा के अनुसार, फागुन के महीने में भगवान आदित्‍य यानी सूर्य की विशेष आराधना का खास महत्‍व होता है। उत्तरायण और वसंत ऋतु होने से इस महीने में सूर्य की पूजा अधिक फलदायिनी मानी जाती है। भगवान सूर्य पर विधिवत जलार्पण से जीवन शक्ति हासिल होती है। कोरोना जैसी महामारी से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। फाल्गुन पूर्णिमा मन्वादि तिथि होने के कारण इस दिन सूर्य को दिए गए अर्घ्य से पितरों को भी संतुष्टि मिलती है।

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देवताओं के अधिपति सूर्य

सूर्य इस समय देवताओं के अधिपति होते हैं। इस समय सूर्य का उत्तरी गोलार्द्ध में भी प्रवेश हो चुका है। इस महीने में धरती के करीब होने से सूर्य का प्रभाव और भी बढ़ जाता है। इस दौरान पूषा नाम के सूर्य देवता अपनी किरणों से धरती पर पेड़-पौधों और इंसानों का पोषण करते हैं।

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रविवार को है अंतिम तिथि

इस बार फाल्गुन का आखिरी दिन यानी पूर्णिमा तिथि रविवार को आ रही है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा आमने-सामने रहते हैं। आपस में समसप्तक योग बनाते हैं। इस बार चंद्रमा सूर्य के नक्षत्र में रहेगा। रवियोग बनना भी महत्‍वपूर्ण है।

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मेडिकल साइंस के अनुसार भगवान सूर्य का महत्‍व

मेडिकल साइंस के अनुसार सूर्य की किरणों से मानसिक तनाव दूर होता है। इससे डिप्रेशन से बाहर निकलने में सहयोग मिलता है। सूर्य की रोशनी में खड़े होने से विटामिन डी की कमी दूर होती है। सकारात्मक ऊर्जा से जीवन भर जाता है। उगते सूर्य को लगातार देखने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

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