Ormanjhi(Kuldeep/Amitabh) : हरे-भरे जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और सुरम्य वादियों के बीच स्थित है कडावेर मंदिर, जहां विराजमान हैं मां अष्टभुजा। यह मंदिर केवल एक पूजास्थल नहीं, बल्कि अनगिनत श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र भी है। मान्यता है कि मां अष्टभुजा की पूजा-अर्चना के दौरान यदि किसी भक्त द्वारा चढ़ाया गया फूल स्वयं मां के हाथों से गिर जाये, तो उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। यही कारण है कि यहां आने वाले भक्त अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ माता के चरणों में पुष्प अर्पित करते हैं और निहारते हैं मां के वरद हस्त को, जो किसी न किसी की झोली खुशियों से भरने को तत्पर रहता है। इस प्राचीन मंदिर का माहात्म्य दूर-दूर तक फैला हुआ है। हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, मां की आराधना करते हैं और अपने जीवन की परेशानी को दूर करने की कामना करते हैं। पर्व-त्योहारों के अवसर पर यहां का नजारा अद्भुत हो जाता है। प्रकृति की गोद में बसी आस्था और भक्ति का यह प्राचीन मंदिर हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड में है। सुनें क्या बोले मंदिर के मुख्य पुजारी उमेश पाठक…











