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क्या युद्ध विराम का डेट आगे बढ़ेगा? जानें

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KohramLive : 24 नवंबर को शुरू हुआ युद्ध विराम 27 नवंबर तक के लिए निर्धारित था। समझौते के तहत अब तक हमास द्वारा 50 से ज्यादा इस्राइली और विदेशी बंधकों को रिहा किया गया, वहीं, इस्राइल ने 119 फलस्तीनी कैदियों को रिहा किया है। आम से लेकर खास तक के दिमाग में एक ही सवाल, युद्ध विराम के बाद क्या होगा? इस बीच राजनयिकों ने माना है कि दोनों पक्षों के पास युद्धविराम को आगे न बढ़ाने के कई कारण हैं। जानकारों का कहना है कि यदि सभी बंधकों को रिहा कर दिया गया तो हमास इस्राइल पर अपनी पकड़ गंवा देगा। समझौते के पहले चरण में बीते 24 नवंबर को हमास ने कुल 24 बंधकों को रिहा किया। मुक्त कराये गये बंधकों के पहले बैच में 13 इस्राइली, 10 थाई नागरिक और एक फिलिपिनो शामिल थे। दूसरे चरण में यानी 25 नवंबर को 14 बंधकों को छोड़ा गया। वहीं तीसरे चरण में 26 नवंबर को हमास ने गाजा पट्टी से 17 बंधकों को रिहा किया। हमास ने रेड क्रॉस को 13 इस्राइली बंदियों, तीन थाई और एक रूसी को सौंपा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हमास द्वारा इस्राइली बंधकों को रिहा करने के बाद देश के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बयान आया। नेतन्याहू ने कहा कि उनकी सरकार गाजा से सभी बंधकों की वापसी के लिए प्रतिबद्ध है, क्योंकि यह युद्ध के उद्देश्यों में से एक है। नेतन्याहू ने कहा, ‘हमने अपने पहले बंधकों की वापसी पूरी की है। यह युद्ध के उद्देश्यों में से एक है। हम युद्ध के सभी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

सोमवार हमास और इस्राइल के बीच संघर्ष विराम का चौथा और संभावित रूप से अंतिम दिन है। इससे पहले रविवार तक दोनों पक्षों ने संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने की संभावना पर चर्चा की थी, लेकिन अभी तक ऐसे किसी समझौते की घोषणा नहीं की गई है। इस बीच, इस्राइल का कहना है कि अगर हमास और अधिक बंदियों को रिहा करता है तो वह संघर्ष विराम का समय बढ़ाने के लिए तैयार है। वहीं, इस्राइल के नजरिए से देखें तो लिए संघर्ष विराम में बने रहना नेतन्याहू सरकार के लिए खतरों से भरा है। जानकारों का कहना है कि इससे नेतन्याहू का प्रण का क्या जिसमें उन्होंने हमास को जड़ से मिटाने की बात कही थी। नेतन्याहू ने हमास के 7 अक्तूबर के हमले को बर्बरता और सभ्यता के बीच की लड़ाई करार दिया। इसलिए रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस्राइली पीएम शायद ही कोई ऐसा युद्ध बर्दाश्त कर सकते हैं जिसमें उन्हें आधी-अधूरी सफलता मिले।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू को यह एहसास है कि अगर वह किसी अनिश्चित नतीजे पर राजी हो गये तो उनकी उन्हें आलोचना झेलनी होगी। अगर चुनाव की नौबत आई तो हालिया सर्वेक्षणों से नेतन्याहू के पक्ष में बहुत अच्छा नहीं होगा। वहीं, दूसरी ओर इस्राइल पर युद्ध विराम बढ़ाने के लिए वैश्विक दबाव भी है। मिस्र, कतर और अमेरिका लगातार इस पर चार दिवसीय संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने पर दबाव डाल रहे हैं। वहीं युद्ध विराम बढ़ाने में हमास की भूमिका समर्थन में दिखता है। समूह ने कहा, ‘हम मानवीय युद्धविराम समझौते की चार दिन की अवधि समाप्त होने के बाद इसका विस्तार करना चाहते हैं’। हमास अधिक से अधिक संख्या में फलस्तीनी कैदियों की रिहाई चाहता है।

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