KohramLive : गुजरे 16 रोज से सुरंग में कैद मजदूरों को बचाने के चौतरफा ऑपरेशन में दुश्वारियां और उम्मीदें साथ-साथ चल रही हैं। देर शाम हेड निकलते ही रैट माइनर्स सेना की मदद से मैन्युअल खोदाई में जुट गई। खबर है कि बड़कोट साइड से छह ब्लास्ट से 13 मीटर की माइक्रो सुरंग तैयार हुई है। ब्लास्टिंग से कमजोर चट्टानों के गिरने का खतरा बना हुआ है। यहां शॉटक्रिटिंग कर चट्टान को थामा जा रहा है। ऑपरेशन में जुटे MDA के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सईद अता हसनैन ने मीडिया से कहा कि चीजें नियंत्रण में हैं। जरूरत के हिसाब से भोजन और दवायें सुरंग के भीतर भेजी जा रही हैं। मनोवैज्ञानिक पहलुओं को भी महत्व दिया गया है। इसके साथ ही बैकअप संचार स्थापित किया गया है।
सुरंग में वर्टिकल ड्रिलिंग 30 मीटर तक हुई है। पानी निकलने और पत्थर आने के चलते वर्टिकल ड्रिलिंग में कुछ दिक्कत हुई है। वर्टिकल ड्रिलिंग के साथ एक आठ इंच की ड्रिलिंग भी की जा रही है। यह ट्रायल के तौर पर किया जा रहा है। जिसकी 75 मीटर तक ड्रिलिंग हो गई है। सुरंग में फंसी ऑगर मशीन के पार्ट्स काट कर निकाले गये। इसके बाद मैन्युअल ड्रिलिंग का काम शुरू हुआ। इस बीच PM के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने सिल्कयारा सुरंग का जायजा लिया, वहीं, सुरंग में फंसे मजदूरों से बातचीत की। उन्होंने मजदूरों के परिवारों से भी बातें की। मजदूरों को भेजी जा रही खाद्य सामग्री के बारे में जानकारी ली। सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों की दिमागी हालत जानने की खातिर रेस्क्यू रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल होगा। सिलक्यारा पहुंचे रोबोटिक्स साइंटिस्ट मिलिंद राज ने इस बारे में मीडिया को जानकारी दी। राहत एवं बचाओ कार्य के प्रभारी कर्नल दीपक पाटिल ने उन्हें लखनऊ से बुलाया है।
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