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घरों या मंदिरों में क्यों फहराई जाती है महावीरी पताका… जानें

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Ranchi : रामनवमी के पावन अवसर को लेकर राजधानी रांची के बाजार इन दिनों महावीरी पताका से सजे हैं। छोटे-बड़े और विभिन्न डिजाइनों में तैयार यह लाल त्रिकोणीय ध्वज श्रद्धालु बड़े विश्वास के साथ अपने घरों और मंदिरों में लगाते हैं। सनातन परंपरा में इसे भगवान हनुमान की शक्ति, भक्ति, वीरता और विजय का प्रतीक माना जाता है। इस विषय पर पंडित मिश्रा ने बताया कि रामनवमी पर फहराई जाने वाली महावीरी पताका न केवल धार्मिक बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर घर में सुख-शांति और समृद्धि का संचार करती है। पंडित मिश्रा के अनुसार इस ध्वज का उल्लेख महाभारत काल से मिलता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण के कहने पर पांडवों ने अपने रथों पर यह ध्वजा लगाई थी। इसके बाद संख्या में कम होने के बावजूद उन्होंने कौरवों पर विजय प्राप्त की। तभी से यह पताका विजय, साहस और आस्था का प्रतीक मानी जाने लगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार रामनवमी के दिन पुराने महावीरी झंडे को किसी मंदिर या पीपल के पेड़ के पास रखकर विसर्जित कर देना चाहिये और उसकी जगह नया झंडा लगाना चाहिये। इससे भगवान हनुमान की कृपा बनी रहती है और साल भर घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पंडित मिश्रा ने बताया कि महावीरी ध्वजा को वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा) में लगाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिशा में राहु का प्रभाव होता है और ध्वजा लगाने से घर के रोग, शोक और दोष दूर होते हैं। झंडे पर ॐ, स्वास्तिक या हनुमान जी का चित्र अंकित होना शुभ माना जाता है और इसे लाल या केसरिया रंग के कपड़े पर बनाया जाता है।

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