Kohramlive : सावन का महीना शुरू होते ही बाजार से लेकर मंदिरों तक हर तरफ हरे रंग की छटा नजर आने लगती है। महिलायें हरी चूड़ियां, साड़ी और सूट पहनती हैं, जबकि चारों ओर बारिश से प्रकृति भी हरियाली की चादर ओढ़ लेती है।सावन में हरे रंग को इतना शुभ क्यों माना जाता है? इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक और ज्योतिषीय कारण भी बताये जाते हैं।
भगवान शिव और प्रकृति से जुड़ा है हरे रंग का संबंध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन भगवान शिव को समर्पित महीना है। शिव को प्रकृति प्रिय मानी जाती है, इसलिए उनकी पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग और शमी जैसे हरे पत्तों का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सावन में हरे वस्त्र पहनकर शिव-पार्वती की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
हरियाली का प्रतीक है हरा रंग
बरसात के साथ सूखी धरती फिर से हरी-भरी हो जाती है। हरा रंग नई शुरुआत, ताजगी और जीवन का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि सावन में हरे रंग को प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम भी माना जाता है।
सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक
हिंदू परंपरा में हरे रंग को सुहाग, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना गया है। इसलिए सावन में विवाहित महिलायें हरी चूड़ियां और हरे वस्त्र धारण करती हैं। वहीं, कई अविवाहित लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए हरा रंग पहनती हैं।
विज्ञान भी बताता है खास वजह
विशेषज्ञों के अनुसार हरा रंग आंखों को सबसे अधिक सुकून देता है। यह मानसिक तनाव कम करने, मन को शांत रखने और सकारात्मक सोच बढ़ाने में मददगार माना जाता है। मानसून के मौसम में चारों ओर फैली हरियाली का भी मन और मानसिक स्वास्थ्य पर अच्छा असर पड़ता है।
ज्योतिष में बुध ग्रह से जुड़ा है हरा रंग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हरा रंग बुध ग्रह का प्रतीक माना जाता है। बुध को बुद्धि, वाणी, व्यापार और करियर का कारक ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि सावन में हरा रंग धारण करने से बुध ग्रह मजबूत होता है और जीवन में तरक्की व सकारात्मकता आती है।
Disclaimer : यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय परंपराओं और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। वैज्ञानिक दावों की व्याख्या संदर्भ के अनुसार भिन्न हो सकती है।






