Kohramlive : करनाल के वीर लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी आज भी कांप उठती हैं, जब 22 अप्रैल की उस दोपहर को याद करती हैं। “मैंने आतंकी से कहा, मेरे पति को क्यों मारा? अब मुझे भी गोली मार दो। लेकिन आतंकी ने बोला, यहां से चली जाओ।” पहलगाम की उस खूबसूरत वादी में, जहां हनीमून के सपने बुनने थे, वहां गोलियां चलीं थी, वहां बिखर गये सपने और वहां मिट गया एक हंसता-खिलखिलाता जीवन। हिमांशी ने मीडिया को बताया कि बायसरन घाटी में चहल-पहल थी, तभी अचानक गोलियों की आवाज गूंजने लगी। एक आतंकी सेना की वर्दी में था, उसने विनय से धर्म पूछा। विनय ने कहा, हिंदू हूं। अगले ही पल सिर पर चली गोली ने विनय को जमीन पर गिरा दिया। हिमांशी चीखी, रोई, लिपटी। आतंकी से पूछा, “इन्हें क्यों मारा? मेरा क्या कसूर?” पर आतंकी सिर्फ चुप रहा, फिर ठंडी आवाज में बोला, “चली जाओ यहां से।” बीते 6 अप्रैल को गुरुग्राम की हिमांशी से विनय की सगाई हुई थी। 16 अप्रैल को शादी हुई। 22 अप्रैल को हनीमून के बीच गोलियों की गूंज से जीवन की डोर टूट गई। 24 अप्रैल को करनाल में राजकीय सम्मान के साथ विनय को अंतिम विदाई दी गई।
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