Kohramlive : अगर आपने कभी हवाई सफर किया है, तो एक बात जरूर नोटिस की होगी। जैसे ही विमान उड़ान भरने वाला होता है या लैंडिंग की तैयारी करता है, केबिन की लाइटें अचानक धीमी या बंद कर दी जाती हैं। पहली नजर में यह बिजली बचाने का तरीका लग सकता है, लेकिन असल वजह यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी है। आइये जानते हैं इसके पीछे की अहम वजहें…
1. ताकि आंखें अंधेरे के लिये पहले से तैयार रहें
टेकऑफ या लैंडिंग के दौरान यदि किसी कारणवश विमान को तुरंत खाली कराना पड़े, तो यात्रियों को बाहर के माहौल में तेजी से खुद को ढालना होता है। केबिन की रोशनी कम रहने से आंखें पहले ही अंधेरे या कम रोशनी के अनुरूप हो जाती हैं, जिससे बाहर निकलने में आसानी होती है।
2. इमरजेंसी एग्जिट तुरंत नजर आये
विमान के भीतर लगे Emergency Exit के संकेत और फर्श पर बनी गाइड लाइट्स कम रोशनी में ज्यादा स्पष्ट दिखाई देती हैं। इससे आपात स्थिति में यात्री बिना भ्रमित हुये जल्दी से निकास द्वार तक पहुंच सकते हैं।
3. क्योंकि टेकऑफ और लैंडिंग सबसे अहम चरण होते हैं
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, उड़ान के दौरान सबसे संवेदनशील समय टेकऑफ और लैंडिंग माना जाता है। इसी दौरान अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं, ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में यात्रियों की सुरक्षित निकासी तेजी से हो सके।
4. क्रू को बाहर की स्थिति देखने में मिलती है मदद
केबिन की रोशनी कम होने से विमान के क्रू सदस्यों की आंखों पर अंदर की चमक का असर कम पड़ता है। इससे उन्हें खिड़कियों के बाहर की स्थिति या किसी असामान्य गतिविधि पर नजर रखने में आसानी हो सकती है।
क्या हर उड़ान में ऐसा होता है?
ज़रूरी नहीं। यह व्यवस्था अधिकतर रात की उड़ानों या कम रोशनी वाली परिस्थितियों में अपनाई जाती है। दिन के समय, जब बाहर पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी होती है, कई एयरलाइंस केबिन की लाइटें सामान्य भी रख सकती हैं। यह निर्णय विमान के संचालन और सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार लिया जाता है।
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