UP : यूपी पुलिस का दारोगा अंकित यादव एक ऐसा नाम जो पहले न्याय की राह चलता था, पर विवेचना की कड़ियों में वह खुद प्रेम, अविश्वास और झगड़ों में उलझकर एक खतरनाक मोड़ पर जा पहुंचा। मुकदमे की जांच के दौरान दारोगा और महिला किरन, एक-दूसरे के करीब आये। लेकिन यह नजदीकियां धीरे-धीरे आरोपों, धमकियों और अविश्वास में बदल गईं। दारोगा की स्वीकारोक्ति पत्थर की तरह दिल चीर देती है, वो मुझे गालियां देती थी, मां को गलत बोलती थी, दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी देती थी…”इसी तनाव ने इंसान को हैवान में बदल दिया।

झाड़ियों में फेंकी लाश
12 नवंबर की शाम, कार सड़क पर धीरे से रुकी। किरन कार से उतरकर वॉशरूम के लिए गई और पीछे खड़ा था खून से भरा गुस्सा। एक वार, फिर दूसरा लोहे की रॉड से सिर पर हमला। सिर की हड्डियां टूटी, चेहरे पर चोट के निशान, गले पर कसाव के प्रमाण, जैसे लड़ाई जान की नहीं, किसी पुराने बदले की हो। शव को घसीटकर झाड़ियों में फेंक दिया गया।
दारोगा 20 मिनट वहीं बैठा रहा।

CCTV ने खोला राज
घटनास्थल के आसपास सिर्फ एक रास्ता, CCTV कैमरों ने उस कार का पीछा किया जिसे एक राहगीर ने नोट किया था।
फुटेज दारोगा अंकित यादव तक पहुंचा। पूछताछ हुई और सच बारिश की तरह बरसा, “हां, मैंने ही मारा, पहचान हुई, शव बहन का था। दोनों भाइयों ने बताया, दारोगा बार-बार बहन को थाने बुलाता था, 12 नवंबर को भी वह उसी से मिलने निकली थी। घरवालों के आरोपों ने कहानी में एक और मोड़ जोड़ दिया। किरन ने कई मामलों में शिकायत दर्ज की थी, बैंक कर्मचारी पर दुष्कर्म, देवर पर दुष्कर्म, ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न पति से विवाद, विवादों का यह लंबा सिलसिला उसके जीवन को तनावों की जंजीरों में जकड़ता गया और अंततः मौत के द्वार पर छोड़ गया। महोबा CO कार्यालय में तैनात दारोगा अंकित यादव, मूल निवासी रायबरेली…अब जेल में है।




