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जब वर्दी बनी हौसले की ढाल, बिरहोर बेटियों को मिला सम्मान

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Chouparan(Krishna Paswan) : चौपारण की पथरीली जमीन पर जब दो पांवों ने संघर्ष की धूल से गुजरकर सफलता की सीढ़ी चढ़ी, तो इंस्पेक्टर अनुपम प्रकाश की आंखों में गर्व की चमक थी। किरण और चानवा बिरहोर जनजाति की दो बेटियां, जिन्होंने मैट्रिक परीक्षा में कामयाबी की ऐसी मिसाल कायम की कि पूरा प्रखंड ही नहीं, प्रदेश भी तालियां बजा उठा। थाना परिसर उस दिन सिर्फ कानून का ठिकाना नहीं था, वो तो जैसे किसी पिता का आंगन बन गया था। जहां दो होनहार बेटियों को शॉल ओढ़ाकर, किताबें, कपड़े और नकद उपहार देकर इज़्ज़त बख़्शी गई।

इंस्पेक्टर साहब ने कहा, “मैं इन्हें अपनी बहन मानता हूं, और इनके हर सुख-दुख में साथ रहूंगा।” आवाज़ में सच्चाई थी और आंखों में वादा। किरण और चानवा की मेहनत, तपस्या और संकल्प ने बिरहोर समाज को नयी राह दिखाई है। उनकी कामयाबी एक दीप है, जो आने वाली पीढ़ियों के अंधेरे को रोशन करेगा। जहां हर दिन संघर्ष है, वहां से निकलकर जब कोई सपनों को हकीकत बनाता है, तो वो सिर्फ परीक्षा पास नहीं करता, एक नई कहानी लिखता है। और इस बार कहानी का नाम है – बिरहोर की बेटियां।

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