Jamshedpur : जमशेदपुर की रात घनी अंधेरे में डूबी थी, लेकिन यूपी STF और झारखंड ATS के जवानों की नजरें शिकार पर जमी थीं। भूमिहार मेंशन की हर ईंट, हर खिड़की और हर दरवाजा मानो किसी तूफान की आहट महसूस कर रहा था। एक खूंखार अपराधी, जिसने कानून के हाथों से बार-बार खुद को बचाया था, अब अपने आखिरी पलों की ओर बढ़ रहा था। शनिवार, रात 10:30 बजे, सन्नाटे की चादर ओढ़े हुये शहर में अचानक हलचल मची। STF की टीम बड़ी सतर्कता से अंदर दाखिल हुई। हर कदम नपे-तुले, हर सांस कंट्रोल में। लेकिन अनुज कनौजिया को भनक लग चुकी थी—मौत दरवाजे पर दस्तक दे रही है!
आखिरी दांव: बंदूकें तन गईं, पुलिस ने सरेंडर करने का आदेश दिया, लेकिन शातिर अनुज ने जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की तड़तड़ाहट से माहौल कांप उठा। तभी खिड़की से झांकते उसके दोनों हाथों से निकलीं दो पिस्तौलें और शुरू हो गई अंधाधुंध गोलीबारी। जवाबी कार्रवाई में यूपी STF और झारखंड ATS ने अपना मोर्चा संभाला और मात्र 30 मिनट में अनुज के सालों के आतंक का अंत हो गया।
सुबह 11 बजे: गोलियों की आवाज शांत हुई, और जब धुएं का गुब्बार छंटा, तो जमीन पर पड़ा था वो अपराधी, जिसने बरसों तक कानून की आंखों में धूल झोंकी थी। डॉक्टरों ने पुष्टि की—”खेल खत्म!” अब पुलिस की नजर उस ‘शशि’ पर है, जिसने अनुज को पनाह दी थी। इस गुनाह के और कितने सिरों तक पहुंचना बाकी है, ये तो वक्त ही बतायेगा। लेकिन एक बात तय है—कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराध का अंत निश्चित।
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