Kohramlive Desk : मोटा तगड़ा और भारी भरकम शरीर का वजन घटाने के लिहाज से वह रोज जिम जाता था। काया ऐसी हो गई थी कि जब कभी कुर्ता पायजामा में बाहर निकलता तो सरपंच कहकर लोग पुकारते। हरियाणा के पानीपत में एक किसान के घर में जन्मे इस शख्स ने ठाना किसी हालत में वजन घटाना है। जिम से निकल वह टहलते-टहलते पास के एक स्टेडियम में चला जाता था। स्टेडियम में भाला फेंक खेल को देखते रहता था। एक दिन कोच ने उसे पुकारा और बोला बदन तो तगड़ा है, जरा भाला फेंककर दिखाओ कितना दूर फेंक पाते हो। उसने भाला उठाया फेंका सब दंग रह गये। आज तो पूरी दुनिया खासकर अपने वतन भारत को नाज है उसपर। नाम है उसका नीरज चोपड़ा। 87.58 मीटर भाला फेंक 13 साल बाद गोल्ड मेडल हासिल करने वाले दूसरे ओलंपिक खिलाड़ी बने। इससे पहले अभिनव बिंद्रा ने 2008 में हुए बीजिंग ओलंपिक में देश की आन-बान और शान बढ़ाया था। 24 दिसंबर 1997 को किसान सतीश चोपड़ा के घर जन्मे नीरज की दक्षता, क्षमता और योग्यता को भांप लिया था पिता ने। उन्हें लगा अगर इसे मौका दिया जाये तो जरूर कुछ अलग कर दिखायेगा। पिता का पूरा साथ मिला। जिंदगी में विषम परिस्थिति भी आई पर कभी विचलित नहीं हुए नीरज। ओलंपिक के इतिहास में गोल्ड मेडल हासिल कर नीरज सबके दिल अजीज बन गये। आम से लेकर खास तक को नाज है उनपर। उनके इस एतिहासिक गाथा को भुलाया नहीं जा सकता। नीरज के इस उपलब्धि पर देश को नाज है। हरियाणा सरकार ने मनचाहा नौकरी और छह करोड रुपए देने की घोषणाा की।
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