Ranchi (Rupam/Sanjay) : बहुत बुरा हाल है संगठन का। अपने मकसद से पूरी तरह भटक चुका है। पहले माओवादी गरीब गुर्गों के दुख दर्द को दूर करने की खातिर बंदूक थामा करते थे, पर अब केवल एक ही मकसद रह गया है, ज्यादा से ज्यादा धन और हथियार जुटाना। वहीं संगठन में महिलाओं का भी शोषण खूब होने लगा है। संगठन से नाता जोड़ने के बाद पुलिस पीछे पड़ गई। घर तक कुर्क हो गया। परिवार टूट बिखर गये। मदद मांगने पर संगठन के शीर्ष नेता ने साथ तक नहीं दिया। यही वजह है संगठन से मोह भंग हो गया। यह कहना है सरेंडर करने वाले हार्डकोर तीन माओवादियों का।
एरिया कंमाडर बैलुन सरदार, सूरज सरदार उर्फ गाजू एवं गीता मुंडा ने सोमवार को रांची प्रक्षेत्र के डीआईजी पंकज कंबोज के सामने हथियार डाल दिये। यह तीनों खूंखार भाकपा माओवादी नक्सली संगठन के केन्द्रीय कमेटी सदस्य अनल दा दस्ते के सक्रिय सदस्य थे। यह दस्ता 2 मार्च 2019 में लोकसभा चुनाव के ठीक पहले आईईडी लगाकर भाजपा कार्यालय को उड़ा दिया। खरसांवा में पुलिस पिकेट को भी उड़ाया था। 28 मई 2019 में कुचाई में पुलिस पार्टी पर हमला कर दिया। 14 जून 2019 को तिरूलडीह थाना क्षेत्र के कुकडू हाट में पुलिस पेट्रोलिंग पार्टी पर हमला कर हथियार लूट लिये। वहीं पांच पुलिसकर्मी को गोलियां मार दी गई थी। इसी तरह रायजामा पुलिस पिकेट को उड़ा दिया गया। पुलिस मुखबिर करार देकर कई को मौत के घाट उतार डाला।
सरायकेला खरसावां में रहनेवाले बैलुन सरदार ने पुलिस के सामने कई राज खोले। उसके खिलाफ 12 नक्सली मामले पुलिस फाइल में दर्ज है। बैलुन के खिलाफ ज्यादातर मामले हत्या, पुलिस पर हमला और 17 सीएलए एक्ट से जुड़े हैं। वहीं सूरज सरदार उर्फ गाजू के खिलाफ कुल 9 मामले दर्ज है। महिला नक्सली रायमुनी कुमारी उर्फ गीता सात मामले दर्ज है। सरेंडर करने वाले माओवादी गाजू और गीता अब पति पत्नी हैं। दोनों ने इसी साल अप्रैल में शादी कर ली। देखें, सुनें, समझें, क्या बोले आईजी अभियान अमोल वेणुकांत होमकर और सरेंडर करने वाले नक्सली…












