Kohramlive : केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि UPSC इंटरव्यू में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होता। उन्होंने कहा कि पर्सनैलिटी टेस्ट सिस्टम पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और बायस-रहित है। मंत्री के अनुसार, इंटरव्यू से पहले उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह रैंडम प्रक्रिया के आधार पर होता है, ताकि किसी भी प्रकार की पूर्व जानकारी या पक्षपात की गुंजाइश न बचे। मंत्री ने मीडिया को बताया कि इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों को उम्मीदवारों की कैटेगरी (General/OBC/SC/ST) या लिखित परीक्षा में उनके अंकों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती। इससे इंटरव्यू के दौरान जानबूझकर या अनजाने में किसी भी तरह के भेदभाव की संभावना खत्म हो जाती है। वहीं, इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों की पहचान भी उम्मीदवारों से गुप्त रखी जाती है, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष बनी रहती है।
यह सवाल तब उठा जब राज्यसभा में पूछा गया कि क्या UPSC इंटरव्यू में OBC, SC और ST उम्मीदवारों को जानबूझकर कम नंबर दिये जाते हैं, जबकि उनके लिखित अंक जनरल उम्मीदवारों के बराबर होते हैं? इस पर मंत्री ने साफ कहा कि ऐसे आरोप पूरी तरह निराधार हैं, और UPSC की इंटरव्यू प्रणाली किसी भी तरह के भेदभाव की अनुमति नहीं देती। उन्होंने आगे बताया कि पूर्ण पारदर्शिता बनाये रखने के लिये UPSC हर साल सभी चयनित उम्मीदवारों के लिखित, इंटरव्यू और कुल अंक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करता है। इससे अभ्यर्थियों और विशेषज्ञों को परिणाम की स्पष्ट तस्वीर मिलती है। UPSC हर साल देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सर्विसेज परीक्षा आयोजित करता है, जो तीन चरणों, प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू, में पूरी होती है और IAS, IPS, IFS सहित कई सेवाओं के लिये अधिकारियों का चयन करती है।






