Garhwa(Nityanand Dubey) : जंगल की सरसराहट, रात की खामोशी और अचानक गांव की ओर बढ़ते हाथियों का खतरा, इन्हीं चिंताओं के बीच ग्राम पाल्हे में आज एक खास जागरूकता कार्यक्रम हुआ। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम का मकसद था, लोगों को हाथियों के स्वभाव, उनकी चाल-ढाल और संकट के समय सुरक्षित रहने के सरल लेकिन असरदार तरीके सिखाना। चिनिया के थानेदार अमित कुमार ने ग्रामीणों से सीधे और स्नेहिल लहजे में कहा, “हाथी बहुत समझदार होते हैं, आपके डर को भी पहचान लेते हैं। ऐसे में घबरायें नहीं, शांत रहकर उसके मनोविज्ञान को समझें।” उनकी इस बात ने ग्रामीणों के चेहरों पर भरोसे की एक नई रेखा खींच दी। थानेदार ने समझाया कि संकट की घड़ी में पहले से तय उपायों का उपयोग ही इंसान और हाथी दोनों के लिये सुरक्षित रहता है।
हाथियों से बचने के उपाय
थानेदार अमित कुमार ने ग्रामीणों को कुछ व्यवहारिक और सुरक्षित तरीके बताये, जैसे, मिर्ची पाउडर का इस्तेमाल करें, पटाखा फोड़कर आवाज बनाना, हल्की आग की लपटों से हाथियों को दिशा बदलने को प्रेरित करना। उन्होंने स्पष्ट बताया कि “हमारा लक्ष्य हाथियों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि उन्हें रास्ता बदलने के लिये प्रेरित करना है।” कार्यक्रम सिर्फ हाथियों तक सीमित नहीं रहा। थानेदार ने इस मौके पर कई संवेदनशील विषयों पर भी ग्रामीणों को जागरूक किया, जैसे, बाल विवाह की समस्या, महिला सुरक्षा, सड़क सुरक्षा, साइबर अपराध, नशाखोरी, डायन-बिसाही जैसी कुप्रथायें।
गांव में सुरक्षा की नई सोच
यह कार्यक्रम मानव–हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में एक कदम था, गांव में एक सुरक्षित और जागरूक माहौल बनाने की पहल भी बना। ग्राम पाल्हे के लोग कार्यक्रम के अंत में एक सुर में कह रहे थे, “अब हम समझदारी से, संगठित होकर हाथियों से निपटेंगे, डर से नहीं।”






