राजधानी रांची में पानी की खातिर बन गये चोर, क्या बोले गांववाले… देखें वीडियो

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Ranchi(Akhilesh Kumar) : यह कहानी किसी दूर-दराज के पहाड़ी गांव की नहीं, बल्कि राजधानी रांची से महज तीन किलोमीटर दूर बसे नामकुम के बड़ाम पंचायत के कुआंटोली और उपरटोली की है। यहां प्यास रोज का संघर्ष बन चुकी है। हालात इतने खराब हैं कि लोग पानी की एक बाल्टी के लिये दर-दर भटकने को मजबूर हैं। कभी हाथ जोड़कर गुहार लगानी पड़ती है, तो कभी अपमान का घूंट पीना पड़ता है। और जब कोई रास्ता नहीं बचता, तो प्यास बुझाने के लिये चोरी-छिपे पानी भरकर घर लाना पड़ता है। गांव के लोगों की आंखों में गुस्सा कम, बेबसी ज्यादा दिखती है। उनकी शिकायत केवल इतनी है कि उन्हें जीने के लिये पानी चाहिये, लेकिन वह भी उन्हें सम्मान के साथ नसीब नहीं हो रहा।

नल लगा, लेकिन कभी नहीं निकला पानी

कुआंटोली के ग्रामीण बताते हैं कि सरकारी योजना के तहत पानी सप्लाई के लिये नल तो लगा दिया गया, लेकिन आज तक उसमें एक बूंद पानी नहीं आया। गांव में एकमात्र चापाकल है, उससे भी मटमैला और गंदा पानी निकलता है, जो पीने तो दूर, कई बार दूसरे कामों के लिये भी उपयोग योग्य नहीं रहता। ऐसे में लोग आसपास के उन घरों का रुख करते हैं, जहां बोरिंग या कुआं है। लेकिन वहां भी उन्हें सम्मान नहीं, बल्कि ताने और अपशब्द मिलते हैं।

“पानी मांगो तो दरवाजा बंद कर देते हैं”

ग्रामीणों का कहना है कि जब वे पानी लेने पहुंचते हैं, तो कई बार घरों के मालिक नाराज हो जाते हैं। कुछ लोग डांटकर भगा देते हैं, तो कुछ अपने घर का गेट और दरवाजा बंद कर लेते हैं, ताकि कोई पानी न ले सके। ऐसे में कई परिवारों को जरूरत भर पानी भी नहीं मिल पाता। प्यास और मजबूरी के बीच लोग चुपचाप अपमान सहने को मजबूर हैं।

नहाने के लिये दो किलोमीटर दूर नदी का सहारा

भीषण गर्मी में स्थिति और भयावह हो गई है। कई परिवार रोज स्नान तक नहीं कर पाते। कपड़े धोना या नहाना हो तो दो किलोमीटर दूर सपाही नदी तक जाना पड़ता है। लेकिन वहां भी राहत नहीं है। गर्मी के कारण नदी का अधिकांश हिस्सा सूख चुका है और पानी की जगह कीचड़ दिखाई देता है। ग्रामीण उसी गंदले पानी में किसी तरह स्नान कर शरीर को ठंडक पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

उपरटोली में भी वही दर्द, वही संघर्ष

उपरटोली के दर्जनों परिवारों की कहानी भी कुछ अलग नहीं है। यहां सुबह की शुरुआत ही पानी की तलाश से होती है। लोग पानी के लिये गांव-गांव भटकते हैं। जिनके यहां पानी है, उनके सामने हाथ जोड़कर विनती करनी पड़ती है। ग्रामीण बताते हैं कि कई बार अपमान झेलकर खाली हाथ लौटना पड़ता है। और कभी घर खाली मिल जाये, तो मजबूरी में चुपके से पानी भरकर ले आना पड़ता है। जल संकट का असर सामाजिक रिश्तों पर भी पड़ने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि अब रिश्तेदार और मेहमान भी उनके यहां आने से कतराने लगे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि यहां पानी तक उपलब्ध नहीं है।

महिलाओं की दोहरी पीड़ा, शौच के लिये अंधेरे का इंतजार

कुआंटोली की सोनी करमाली और सिमरन कुमारी बताती हैं कि पानी की दिक्कत के साथ-साथ शौचालय की कमी भी बड़ी परेशानी है। गांव के कई घरों में आज तक शौचालय नहीं बन सका है। महिलाओं और युवतियों को खुले में शौच के लिये अंधेरा होने का इंतजार करना पड़ता है। दिन में बाहर जाना मुश्किल है और रात में सुरक्षा का डर बना रहता है। उनका कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को समस्या बताई गई, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।

कम पानी पीने से बढ़ रहीं बीमारियां

जल संकट का असर अब लोगों की सेहत पर भी दिखने लगा है। ग्रामीण बताते हैं कि पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण लोग कम पानी पी रहे हैं। इससे किडनी, पाचन तंत्र, त्वचा और मूत्र संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि लंबे समय तक कम पानी पीना शरीर के लिये गंभीर खतरा बन सकता है।

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