आखिर टूट ही गया ‘सारंडा का सबसे बड़ा किला,’ 1 करोड़ का ईनामी मिसिर बेसरा कस्टडी में…

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Ranchi : जिस नाम से कभी सारंडा के घने जंगल कांपते थे, जिस चेहरे की तलाश में बरसों से सुरक्षाबलों के हजारों जवान जंगल-जंगल भटक रहे थे, वह नाम आखिरकार कानून के शिकंजे में पहुंच गया है। सूत्रों के मुताबिक, झारखंड का मोस्ट वांटेड और एक करोड़ रुपये का ईनामी नक्सली मिसिर बेसरा गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके साथ उसका एक बेहद करीबी सहयोगी भी सुरक्षाबलों के हत्थे चढ़ा है। फिलहाल दोनों को बेहद गोपनीय स्थान पर रखा गया है, जहां केंद्रीय और राज्य की कई जांच एजेंसियां लगातार पूछताछ कर रही हैं। झारखंड पुलिस की यह उम्दा कामयाबी झारखंड CRPF के IG साकेत कुमार सिंह के अगुवाई में चल रहे संयुक्त अभियान का सबसे बड़ा नतीजा मानी जा रही है। अभियान की रणनीतिक निगरानी झारखंड की DGP तदाशा मिश्र एवं CRPF के IG साकेत कुमार सिंह के नेतृत्व में की जा रही थी।

सारंडा के जंगल से पूछताछ के कमरे तक…

पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा और कोल्हान के दुर्गम जंगल वर्षों तक मिसिर बेसरा के सुरक्षित ठिकाने माने जाते रहे। सुरक्षाबलों की लगातार घेराबंदी, नये सुरक्षा कैंप, सड़क निर्माण और लगातार चल रहे ऑपरेशन ने उसके नेटवर्क को कमजोर कर दिया था। पिछले कुछ महीनों में उसके कई करीबी सहयोगियों ने आत्मसमर्पण किया या गिरफ्तार हुये, जिससे उसका संगठन लगातार बिखरता गया। सूत्रों का दावा है कि शुरुआती पूछताछ में मिसिर बेसरा ने नक्सली नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई, लेवी वसूली, जंगलों में बने ठिकानों और कई सक्रिय सहयोगियों के बारे में अहम जानकारियां दी हैं। जांच एजेंसियां इन सूचनाओं का मिलान पहले से मौजूद खुफिया इनपुट से कर रही हैं।

कौन है मिसिर बेसरा?

मिसिर बेसरा लंबे समय से प्रतिबंधित CPI (माओवादी) का शीर्ष नेता माना जाता रहा है। वह संगठन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता था और झारखंड, ओडिशा तथा आसपास के इलाकों में सक्रिय नेटवर्क से जुड़ा रहा। उस पर झारखंड सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। हाल के महीनों में सुरक्षाबलों के दबाव के कारण उसके दस्ते के कई सदस्य आत्मसमर्पण कर चुके थे और सुरक्षा एजेंसियां लगातार उसके करीब पहुंच रही थीं। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी की पुष्टि एक आला पुलिस अधिकारी ने कर दी है। यह गिरफ्तारी झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी सफलताओं में गिनी जायेगी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे सारंडा-कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को गहरा झटका लगेगा और आने वाले दिनों में कई और अहम गिरफ्तारियां या आत्मसमर्पण सामने आ सकते हैं।

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