Ranchi : जैसे ही बाहर यह खबर आई कि राष्ट्रपति पद का सरताज द्रौपदी मुर्मू के नाम, आदिवासियों में खुशियां छा गई। हालांकि कई राज्यों में जश्न मनाया गया। आजाद भारत में पहली दफा एक आदिवासी महिला देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हुई है। आदिवासियों को उनपर नाज है। राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर खूब ढोल बजाये गये, वहीं पटाखे फोड़ खुशियों का इजहार किया गया।
केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा पर खुशियां इस कदर छाई है कि उनका भी सीना 56 इंच का हो गया। पूरी दुनिया के आदिवासियों के लिये आज का दिन बहुत ही खास है। समिति के महासचिव कृष्ण कांत टोप्पो ने अपनी खुशी का इजहार करते हुये कहा कि यह लम्हा ऐतिहासिक है। चडरी सरना समिति के प्रधान महासचिव सुरेंद्र लिंडा ने कहा कि यह पहला अवसर जब एनडीए व उनके घटक दलों के सार्थक प्रयास से एक आदिवासी महिला को राष्ट्रपति पद पर चुन पूरे आदिवासी महिलाओं को मान सम्मान दिया गया है।
समिति के मुख्य पाहन जगलाल पाहन के आंखों में खुशी के मारे आंसू छलक आये। उन्होंने बस इतना कहा कि जिंदगी के कठिन सफर तय कर द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद हासिल किया है। यह काबिले तारिफ है। समिति के अध्यक्ष सबलू मुंडा ने कहा कि भारत देश में जो स्थितियां-परिस्थितियां हैं, उसमें कभी सोचा भी नहीं जा सकता था कि एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनेगी।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में मुख्य रूप से केंद्रीय सरना समिति के कार्यकारी अध्यक्ष शोभा कच्छप, अमर मुंडा अभय भूत कुंवर, सुनील टोप्पो, मुकेश मुंडा, शंकर लिंडा, आकाश मुंडा, अप्पू लिंडा, विक्की मुंडा, प्रकाश मुंडा, राहुल मुंडा, उदय मुंडा, अशोक मुंडा, भीम मंडल, टिंकू चौधरी, मदन तिर्की, गोलू मुंडा, संगीता टोप्पो, चीकू लिंडा, आशीष लिंडा, दुर्गा तिर्की, राजन तिर्की, पल्लू मुंडा, बजरंग मुंडा, पनीर मुंडा, ज्योति होरो, अक्षय मुंडा सहित कई अन्य लोग मौजूद थे।
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