Choupran(Krishna Paswan) : चौपारण की शांत वादियों से एक नाम इस बार आसमान तक गूंजा मिथुन यादव। कभी गांव की पगडंडियों पर नंगे पांव दौड़ते इस बच्चे ने अब भारत सरकार के खान मंत्रालय में सहायक रिसर्च ऑफिसर बनकर न केवल अपने गांव टोईया, बल्कि पूरे झारखंड का नाम रोशन कर दिया।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित इस परीक्षा में देश भर से चुने गए 15 मेधावियों में मिथुन ने अखिल भारतीय स्तर पर 8वां स्थान पाया। एक ऐसी उपलब्धि, जो संघर्ष की कोख से जन्मी है और सपनों की ऊंचाइयों तक पहुंची है। पर यह कहानी केवल सफलता की नहीं है, यह उस दर्द की भी दास्तान है जो एक पिता के असमय चले जाने के बाद एक छोटे से बच्चे की आंखों में पलने लगे सपनों को छीन सकता था। परंतु जहां राह कठिन हो, वहां संकल्प की आग ही रास्ता बनाती है। मिथुन के बड़े भाई संजय यादव ने पिता का साया बनकर न केवल उसे पढ़ाया, बल्कि उसके हौसलों को उड़ान दी।
IIT-ISM धनबाद से मिनरल इंजीनियरिंग की पढ़ाई, फिर दक्षिण अफ्रीका की धरती पर तीन साल का अनुभव और अब भारत सरकार के लिए सेवा—मिथुन की यात्रा में हर मोड़ एक कहानी है, और हर कहानी एक मिसाल। अब जब वो प्रखंड के दूसरे UPSC सफल युवा बने हैं, तो उनका नाम उस प्रेरणा-सूची में शामिल हो चुका है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मशाल बन सकती है। टोईया का यह लाल साबित कर गया कि हालात चाहे जैसे हों, अगर इरादे बुलंद हों, तो कोई भी चौपारण से चलकर दिल्ली की दहलीज तक पहुंच सकता है।












