Ranchi :आज की बेटियां कल की मां होंगी। बिना माताओं के इस संसार में सृजन संभव नही है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की परिकल्पना से ही बेहतर कल संभव है। अल्ट्रासाउण्ड के पहले या बाद में केन्द्र पर किसी चित्र, संकेत, वाक्य या शब्दों के माध्यम से लड़का या लड़की होने का खुलासा नही कर सकते हैं। ऐसा करना दंडनीय अपराध है। यह कहना है स्वास्थ्य विभाग के उपनिदेशक डॉ आरएन शर्मा का। उन्होंने PCPNDT एक्ट को सख्ती से लागू करने के लिए जोर दिया। मौका था राजधानी रांची से सटे नामकुम के लोक स्वास्थ्य संस्थान के IPH सभागार में आयोजित PCPNDT पर राज्य स्तरीय प्रशिक्षण का। इस कार्यक्रम में अलग-अलग जिलों से आये चिकित्सा पदाधिकारी एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई के कर्मचारियों को एक दिन की ट्रेनिंग दी गई। मौके पर पीसीपीएनडीटी कोषांग की समन्वयक रफत फरजाना ने इस कानून से संबंधित जानकारी प्रशिक्षणार्थियों को दी। प्रशिक्षण में कार्यकारी सहायक संजय, मनोरमा टुडू और पूनम ने भी प्रशिक्षण में सहयोग किया।
इस कार्यक्रम का मकसद कन्या भ्रूण हत्या को रोकना और जनसंख्या में लड़कियों के अनुपात को बढ़ावा देना था। इस अधिनियम के तहत गर्भधारण से पहले या बाद में लिंग परीक्षण कानून अपराध है। इसमें अल्ट्रासाउंड जैसी तकनीकों के प्रयोग से व्यक्ति द्वारा गर्भवती महिला अथवा उसके रिश्तेदारों को शब्दों, संकेतों अथवा किसी अन्य तरीके से भ्रूण के लिंग की जानकारी देना गैर कानूनी है। ऐसे व्यक्ति, संस्थान या केंद्र के संचालक को तीन वर्ष से 5 वर्ष तक की कैद हो सकती है और 10 हजार रुपये से 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। सभी अल्ट्रासाउण्ड क्लिनिक द्वारा आनलाईन फार्म एफ का संधारण जरूरी है।
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