Latehar : लातेहार के बरियातू प्रखंड के मतकोमा गांव में अंधविश्वास की कीमत एक युवक को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। घर में मौजूद पंकज गंझू को सांप ने डंस लिया। सांप के काटने के बाद पंकज की तबीयत बिगड़ने लगी और वह बेहोश हो गया, घरवालों ने अस्पताल ले जाने के बजाये झाड़-फूंक का रास्ता चुना। खबर है कि करीब तीन घंटे तक झाड़-फूंक होती रही। इस दौरान समय लगातार हाथ से निकलता रहा और जहर शरीर में फैलता गया। बीती रात परिजन आखिरकार पंकज को अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
डॉक्टर बोले, समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान
चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुरेंद्र कुमार ने मीडिया को बताया कि युवक को अस्पताल लाये जाने तक उसकी मौत हो चुकी थी। पूछताछ में पता चला कि सांप ने शाम में ही काट लिया था, लेकिन अस्पताल लाने के बजाय करीब तीन घंटे तक झाड़-फूंक कराई गई। डॉक्टर ने लोगों से अपील की कि सांप या किसी भी विषैले जीव के काटने पर ओझा-गुनी और झाड़-फूंक के भरोसे समय बर्बाद न करें। ऐसे मामलों में मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना सबसे जरूरी होता है, क्योंकि समय पर इलाज मिलने से जान बचने की पूरी संभावना रहती है।
जागरूकता के बावजूद कायम है अंधविश्वास
सरकार की ओर से ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके बावजूद कई गांवों में आज भी लोग झाड़-फूंक और टोने-टोटके पर भरोसा कर बैठते हैं। मतकोमा गांव की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सांप के काटने पर इलाज का रास्ता अस्पताल से होकर जाता है, अंधविश्वास से नहीं। कई बार कुछ घंटों की देरी ही जिंदगी और मौत के बीच की दूरी बन जाती है।
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