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खामेनेई के सुपुर्द-ए-खाक होने से पहले हजारों कब्रें तैयार, वजह… जानें

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Kohramlive : ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कई दिनों तक चलने वाली अंतिम विदाई को लेकर पूरे देश में अभूतपूर्व सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां की गई हैं। अधिकारियों को आशंका है कि अंतिम यात्रा में लाखों लोग शामिल हो सकते हैं। इसी को देखते हुये भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े पैमाने पर इंतजाम किये गये हैं। जर्मन अखबार डी वेल्ट की रिपोर्ट के अनुसार, संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिये विशेष इकाइयां बनाई गई हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि तेहरान के बेहिश्त-ए-जहरा कब्रिस्तान में बड़ी संख्या में नई कब्रें तैयार की गई हैं और प्रशासन ने बड़ी संख्या में संभावित मृतकों की स्थिति से निपटने की योजना भी बनाई है। हालांकि, इन संभावित मृत्यु आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

तेहरान से मशहद तक चलेगी अंतिम यात्रा

अंतिम विदाई की रस्में तेहरान से आगे पवित्र शहर कोम और फिर इराक के शिया तीर्थस्थलों नजफ तथा करबला तक जायेंगी। अंतिम संस्कार कार्यक्रम का समापन मशहद में प्रस्तावित है, जहां खामेनेई को दफनाया जायेगा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिये तेहरान में कई मार्गों पर यातायात प्रतिबंध लगाये गये हैं। शोक यात्रियों के आवागमन के लिये हजारों बसें चलाई जा रही हैं। भोजन की व्यवस्था के लिये अस्थायी रसोई बनाई गई हैं, जबकि स्कूलों और मस्जिदों को अस्थायी आवास में बदला गया है। प्रशासन का मानना है कि भीषण गर्मी और भारी भीड़ साथ आने पर स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

पहले भी हो चुकी हैं दर्दनाक घटनायें

ईरान इससे पहले भी बड़े अंतिम संस्कार समारोहों में हादसे देख चुका है। वर्ष 2020 में कासिम सुलेमानी की अंतिम यात्रा के दौरान भगदड़ में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी की अंतिम विदाई के दौरान भी अफरातफरी में कई लोगों की जान गई थी।

भीड़ ही नहीं, सुरक्षा खतरे भी चिंता का कारण

भीड़ प्रबंधन के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियां संभावित हमलों और अन्य खतरों को लेकर भी सतर्क हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने समारोह के दौरान किसी भी हमले की कोशिश पर कड़ी चेतावनी दी है। अधिकारियों की चिंता केवल बाहरी खतरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के भीतर सक्रिय सशस्त्र समूहों और अलगाववादी संगठनों को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।

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