Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा का बरवाडीह पंचायत का आसमान अभी भी उस शाम को नहीं भूल पाया है, जब RTI कार्यकर्ता योगेंद्र साव पर गोलियां चली थीं। वे जो सवाल पूछते रहे, वे जो सच की मशाल जलाते रहे, उन्हीं के खिलाफ साजिशों के अंधेरे गहराने लगे थे। योगेंद्र साव अब न्याय की चौखट पर दस्तक दे रहे हैं। गढ़वा में घोटालों की परतें उधेड़ने वाले योगेंद्र साव ने हाई कोर्ट के मशहूर अधिवक्ता राजीव कुमार से मुलाकात की है। उनके हाथों में 2016 से 2025 तक के मनरेगा सहित अन्य योजनाओं में हुये भ्रष्टाचार के दस्तावेज थे, उन्होंने मेहनतकशों की चीखों को अपनी आवाज दी है। खबर है कि योगेंद्र साव ने अपने ऊपर हुये हमले की सच्चाई रखी, वहीं उन आशंकाओं को भी उजागर किया जो बरसों से उनके दिल में एक धधकती आग की तरह जल रही थीं। उन्होंने साफ़ कहा—गढ़वा पुलिस साजिश के असली सूत्रधार तक नहीं पहुंच पा रही, क्योंकि वो एक दबंग शख्स है।
सूत्रों के अनुसार साल 2020 में ही योगेंद्र ने चिनिया थाना को लिखित आवेदन देकर यह आशंका जताई थी कि उनकी जान को खतरा है। योगेंद्र साव न्याय की आखिरी उम्मीद लेकर हाई कोर्ट पहुंचे हैं। अधिवक्ता राजीव कुमार ने उनकी बात सुनी, उनके दस्तावेजों को परखा और यकीन दिलाया कि CBI की जांच उस साजिश के हर धागे को खोलेगी, जो अंधेरे में बुनी गई थी। इस मामले में सिर्फ योगेंद्र साव ही नहीं, बल्कि गढ़वा के कई और नाम भी सामने आ रहे हैं। दबंग किस्म के पांच लोग जांच के घेरे में हैं। उनकी संपत्तियों की भी जांच की मांग की जा रही है। राजीव कुमार का कहना है कि सत्य की राह मुश्किल जरूर होती है, लेकिन अंततः जीत उसी की होती है। CBI की जांच मुख्य षड्यंत्रकारी तक जरूर पहुंचेगी और तब सच खुद बोलेगा।












