कोहराम लाइव डेस्क : हिंदी के जाने-माने कवि सोहन लाल द्विवेदी ने बीसवीं शताब्दी की अपनी एक कविता में लिखा है- कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। आज के इक्कीसवीं सदी के न्यू इंडिया में इसे यूं कहें कि कोशिश जारी रखने वालों की हार नहीं हो सकती, तो यह अधिक कम्यूनिकेटिव जान पड़ती है। दोनों जगह भाव एक ही है। यह कि थकने अथवा जीवन में शिकस्त नहीं मानकर असफलता के बाद कोशिश जारी रखने पर कामयाबी जरूर मिलेगी। इसके साथ याद कीजिए। दुनिया की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी के को-फाउंडर नारायण मूर्ति ने अमेरिका में दिए अपने एक लेक्चर में कहा था कि आदमी अपनी सफलताओं से उतना नहीं सिखता, जितना असफलताओं से। तात्पर्य यह कि एक कोशिश में मिली सफलता स्थायी खुशी नहीं दे सकती, पर असफलता के बाद कोशिश की सकारात्मक ऊर्जा आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
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उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य को न पा लो
याद कीजिए, स्वामी विवेकानंद का एक अत्यंत लोकप्रिय कथन है ‘उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक अपने लक्ष्य को न प्राप्त कर लो’। इससे प्रेरणा लेने के बदीले कई बार हम एक-दो बार असफल होने पर अपने लक्ष्य को पाने के लिए प्रयास छोड़कर बैठ जाते हैं। सच्चाई है कि यदि हम कोशिशें जारी रखें तो हमें कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता है।
शार्क और छोटी मछलियों की जीवन की कहानी
एक प्रयोग में एक रिसर्च बायोलॉजिस्ट ने एक बड़े से टैंक में शार्क मछली को रखा और फिर उसी टैंक में छोटी मछलियों को भी डाल दिया। शार्क ने छोटी मछलियों को खाना शुरू कर दिया और कुछ ही घंटों में सभी छोटी मछलियां शार्क का आहार बन चुकी थीं। हर बार यही होता। बायोलॉजिस्ट ने अब अपने प्रयोग में थोड़ा परिवर्तन किया और एक मजबूत फाइबर स्लाइड को उस टैंक में डाल कर टैंक को दो भागों में बांट दिया। एक भाग में शार्क और दूसरे भाग में छोटी मछलियों को रखा। आदतन शार्क ने छोटी मछलियों पर हमला करना चाहा तो वे उस स्लाइड से टकरा गईं। शार्क ने प्रयास नहीं छोड़ा और हमला करती रही।
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यह प्रयोग कुछ हफ्तों तक जारी रहा। शार्क ने हमला करना जारी रखा, लेकिन उसके प्रयास में लगातार कमी आती गई। फिर एक समय ऐसा आया कि शार्क ने यह मान लिया कि वह छोटी मछलियों को नहीं खा सकती। उसने प्रयास करना ही छोड़ दिया। बायोलॉजिस्ट ने अब फाइबर की स्लाइड को वहां से हटा दिया। लेकिन यह क्या, शार्क को तो इससे कोई फर्क ही नहीं पड़ा। उसने यह मान लिया था कि एक दीवार है, एक अवरोध है, जिसे वह पार नहीं कर सकती। उसने प्रयास करना ही छोड़ दिया अब छोटी मछलियां आराम से उसी टैंक में तैर रहीं थी और उसे शार्क से कोई खतरा भी नहीं था।
इस कहानी से मिली नसीहत
हममें से कई लोगों के जीवन में अक्सर ऐसा होता है। हम प्रयास करना ही छोड़ देते हैं। कोई रुकावट नहीं होने के बावजूद हमें ऐसा लगता है कि बाधा है, जिसे पार नहीं किया जा सकता। अगर किसी चीज को पाने के लिए हम ईमानदारी से लगातार प्रयास जारी रखते हैं, तो वह हमें जरूर मिलती है। बस भरोसा रखना जरूरी है।
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