कोहराम लाइव डेस्क : आस्था के महापर्व छठ को लेकर झारखंड सरकार ने गाइडलाइन जारी कर दिया है। इस बार छठ महापर्व नदी-तालाबों में मनाने पर रोक लगाई गई है। इसमें कहा गया है कि छठ महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं के लिए नदियों व तालाबों में केंद्र सरकार के निर्देशों और सोशल डिस्टेंसिंग (दो गज दूरी) का पालन संभव नहीं है। ऐसे में लोगों को अपने घरों में ही इस बार छठ महापर्व का मनाना होगा।
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आपदा प्रबंधन विभाग ने दिशा-निर्देश जारी कर कहा है कि इस बार छठ महापर्व के दौरान किसी भी नदी, लेक, डैम या तालाब के छठ घाट पर किसी तरह के कार्यक्रम का आयोजन नहीं होगा। छठ घाट के समीप कोई दुकान, स्टॉल आदि नहीं लगेगा। पर्व के दौरान सार्वजनिक स्थल पर पटाखा जलाना, लाइटिंग और मनोरंजन संबंधी कार्यक्रम पर पूरी तरह से रोक रहेगी।
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बता दें कि चार दिवसीय छठ महापर्व 18 नवंबर से शुरू होगा। 18 नवंबर को नहाय-खाय और 19 नवंबर को खरना है। 20 नवंबर को पहला अर्घ्य और 21 नवंबर को दूसरा अर्घ्य के साथ पारन है। हालांकि, कोरोना (कोविड-19) महामारी की वजह से इस बार तालाबों और नदियों के किनारे छठ महापर्व का आयोजन नहीं किया जा सकेगा।
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नदी-तालाबों में स्नान से कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा
आपदा प्रबंधन विभाग की मानें तो छठ महापर्व के दौरान नदी, तालाब, डैम, लेक आदि में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के लिए मास्क पहनना संभव नहीं है। साथ ही घाटों पर दो गज की दूरी मेंटन करना भी संभव नहीं है। वहीं नदी-तालाब में एक साथ सैकड़ों भक्त भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए उतरेंगे। ऐसे में कोरोना का संक्रमण फैल सकता है। जिसको लेकर लोगों से घरों में ही इस बार छठ मनाने की अपील की गई है।
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बिहार में तालाबों में पूजा की अनुमति, घाटों पर रोक
छठ महापर्व को लेकर बिहार सरकार ने भी दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं। इसके तहत इस बार गंगा समेत राज्य की तमाम बड़ी नदियों के घाटों पर छठ पर्व का आयोजन नहीं होगा। लेकिन, ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में मौजूद तालाब में छठ पर्व करने की अनुमति दी गयी है। इस दौरान कोविड-19 से जुड़े तमाम दिशा-निर्देशों का पालन कराया जायेगा।
जिन तालाबों में छठ पर्व का आयोजन होगा, वहां अर्घ्य से पहले और बाद में पूरे तालाब क्षेत्र को सैनिटाइज कराने की व्यवस्था की जायेगी। यह काम नगर निकाय और ग्राम पंचायत के स्तर से कराया जायेगा। घाटों के आसपास किसी तरह के खाने-पीने के स्टॉल नहीं लगाये जायेंगे। घाट पर किसी तरह का भोज या प्रसाद का वितरण नहीं किया जायेगा।












