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दादा-दादी और नाना-नानी के प्यार में नहाया ये पब्लिक स्कूल…

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Garhwa(Nityanand Dubey) : कहते हैं, ” दादा-दादी की रहमत जिनपर बरसती है, उनके संग-संग दुआ एवं खुशियां चलती है। ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल, टंडवा में शुक्रवार का दिन कुछ खास था। बच्चों की किलकारियाँ और दादा-दादी, नाना-नानी की मुस्कानें एक अलग ही शमां बिखेर गई। स्कूल में ‘दादा-दादी एवं नाना-नानी दिवस’ के न्योता पर स्कूल पहुंचे दादा-दादी और नाना-नानी नन्हे-मुन्ने बच्चों के साथ जीवन के सबसे यादगार पल बिताये।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत गीत और दीप प्रज्वलन से हुई। बच्चों की मासूम आवाज़ों में गूंजता स्वागत गीत माहौल में मिठास घोल गया। स्कूल के प्राचार्य डॉ. मनोज सरीन ने कहा, “दादा-दादी और नाना-नानी बच्चों की पहली पाठशाला हैं। उनके अनुभव और स्नेह बच्चों के संस्कारों की नींव मजबूत करते हैं।” उन्होंने सभी बुजुर्गों से आग्रह किया कि वे अपने पोते-पोतियों के साथ अधिक समय बितायें और उन्हें अपने जीवन के अनुभवों और हुनर से शिक्षित करें। इसके बाद तो खुशियों की घटा छा गई। छोटे-छोटे बच्चों ने रंग-बिरंगे कपड़ों में ग्रुप डांस प्रस्तुत किया, वहीं, स्कूल की नृत्य शिक्षिका ने जब जुम्बा डांस कराया तो बच्चों के साथ-साथ दादा-दादी भी थिरकने से खुद को रोक नहीं पाये। बच्चों की मासूमियत और बुजुर्गों की मुस्कानें एक साथ देखने लायक थीं।

सबसे मज़ेदार मोड़ तब आया जब ‘म्यूजिकल चेयर’ का खेल हुआ। दादा-दादी और नाना-नानी जब कुर्सियों के घूमते हुये खेल में हिस्सा ले रहे थे, तो बच्चों की तालियाँ और हौसला अफजाई से पूरा स्कूल गूंज उठा। हर चेयर पर बैठने की जद्दोजहद में जैसे बच्चों और बुजुर्गों के बीच का फासला पूरी तरह मिट गया।

इस खास मौके पर प्रेप की जाहरा यास्मीन के पिता मोहम्मद आयूब ने भावुक होते हुये कहा, “ऐसे कार्यक्रम न सिर्फ बच्चों को बुजुर्गों के करीब लाते हैं, बल्कि हमें भी अपने बचपन की याद दिला देते हैं। स्कूल का यह प्रयास सराहनीय है।” वहीं नर्सरी के आकाश पांडेय के पिता नागेंद्र पांडेय और विराज चंदोक के माता-पिता विजय कोहली एवं नीलम कोहली ने भी स्कूल की प्रशंसा करते हुये कहा कि “यह परिवार के हर सदस्य को एक साथ जोड़ने का अनमोल मौका है।”

स्कूल प्रबंधन ने भी सभी अभिभावकों और बुजुर्गों का तहेदिल से धन्यवाद किया और जानकारी दी कि सत्र 2025-26 के लिये नामांकन शुरू हो चुका है। अब स्कूल में बारहवीं तक की पढ़ाई की पूरी व्यवस्था हो चुकी है, वहीं, यह विद्यालय बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने अपने दादा-दादी और नाना-नानी के गले लगकर उन्हें फूल भेंट किये, और स्कूल प्रांगण में खुशियों की गूंज देर तक सुनाई देती रही। विद्यालय के शिक्षक और सहकर्मी भी इस आयोजन का हिस्सा बनकर इन खूबसूरत पलों के गवाह बने।

क्यों जरूरी है ऐसे आयोजन?

ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल का यह प्रयास सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह बच्चों और बुजुर्गों के बीच के रिश्ते को मजबूत करने का जरिया था। आज के दौर में जब बच्चे टेक्नोलॉजी में उलझे रहते हैं, ऐसे आयोजन उन्हें परिवार की जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं। यह सिर्फ एक दिन का जश्न नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच संवाद और प्रेम का सेतु है। और हाँ, इस स्कूल में बच्चों को बेहतर शिक्षा और संस्कार देने की कोशिश में है।

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