Ramgarh(Prince Verma) : जिंदगी कभी-कभी ऐसा इम्तिहान लेती है कि इंसान के हिस्से केवल आंसू और बेबसी ही बचते हैं। रामगढ़ के रजरप्पा में लाल करमाली के निधन के बाद उनकी पत्नी काजल कुमारी और तीन मासूम बच्चों की जिंदगी भी कुछ ऐसी ही हो गई थी। घर का सहारा छिन गया, चूल्हा जलाना तक मुश्किल हो गया। लेकिन तभी खाकी वर्दी में एक ऐसा चेहरा सामने आया, जिसने यह एहसास दिलाया कि इंसानियत आज भी जिंदा है।
निजी खर्च से पहुंचाई राहत
रजरप्पा के थानेदार इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार ने अपने निजी खर्च से काजल कुमारी और उनके बच्चों राधिका, दीपिका और आदित्य को पांच बोरा चावल, 10 किलो दाल और सभी के लिये दो-दो सेट नये कपड़े भेंट किये। थाना परिसर में जब राहत सामग्री बच्चों के हाथों तक पहुंची, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। यह मदद एक टूटे हुये परिवार को यह भरोसा दिलाने की कोशिश थी कि वे अकेले नहीं हैं। इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार ने यहीं तक अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी। उन्होंने काजल कुमारी को आश्वस्त किया कि उन्हें सरकार की हर पात्र योजना का लाभ दिलाने के लिये वे खुद संबंधित अधिकारियों से बात करेंगे और पूरी कागजी प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।
इंसानियत ही उनकी सबसे बड़ी पहचान
रजरप्पा में इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार का यह मानवीय चेहरा कोई नई बात नहीं है। लावारिस शवों को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देना हो, किसी गरीब की बेटी की शादी में मदद करनी हो या फिर किसी जरूरतमंद परिवार के चेहरे पर मुस्कान लौटानी हो, वे हर बार सबसे आगे दिखाई देते हैं। वे अक्सर कहते हैं, “वर्दी पहनने का मतलब सिर्फ कानून का पालन कराना नहीं, बल्कि वक्त आने पर किसी के जख्मों पर मरहम लगाना भी है।” इस तरह पुलिस की वर्दी केवल डर नहीं, भरोसे की पहचान बनी।
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